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38 लोगों की फांसी की सजा बरकरार

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अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट केस में गुजरात हाईकोर्ट का बड़ा फैसला


अहमदाबाद। गुजरात हाई कोर्ट ने 2008 के अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट केस में अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने इस मामले में 38 दोषियों की मौत की सजा को बरकरार रखा है।
बता दें कि अहमदाबाद सिटी सेशंस कोर्ट ने इस मामले में फैसला सुनाते हुए 38 दोषियों को मौत की सजा और 11 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके बाद राज्य सरकार की तरफ से हाई कोर्ट में एक कन्फर्मेशन याचिका दायर की गई थी। इसी पर फैसला सुनाते हुए हाई कोर्ट ने फैसले को बरकरार रखा है।

अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट में बमों को साइकिलों पर रखे टिफिन बॉक्स के अंदर छिपाकर प्लांट किया गया था। इसके अलावा सूरत शहर से भी कई जिंदा बम बरामद किए गए थे जो तकनीकी खराबी के कारण फट नहीं पाए। आतंकियों ने मुख्य रूप से भीड़भाड़ वाले बाजारों, सार्वजनिक बसों और यहां तक कि सिविल अस्पताल को निशाना बनाया था ताकि ज्यादा से ज्यादा नुकसान हो। इस हमले की जिम्मेदारी आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन ने ली थी, जो प्रतिबंधित संगठन ‘सिमी’ से ही जुड़ा एक धड़ा था।जांच में एजेंसियों ने दावा किया था कि आतंकियों ने साल 2002 में हुए गुजरात दंगों का बदला लेने के लिए इस पूरी साजिश को रचा था।

अहमदाबाद ब्लास्ट केस का मामला स्पेशल कोर्ट में चला थ। फरवरी 2022 में लंबी सुनवाई के बाद विशेष अदालत ने 77 आरोपियों में से 28 को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था। अदालत ने 49 आरोपियों को दोषी माना, जिसमें से 38 को फांसी की सजा और 11 को मरते दम तक उम्रकैद की सजा सुनाई गई। भारतीय न्याय व्यवस्था के इतिहास में यह पहली बार था जब एक साथ इतने सारे दोषियों को मौत की सजा दी गई। 2008 के अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट की जांच गुजरात पुलिस की अपराध शाखा (क्राइम ब्रांच) द्वारा की गई थी। इस विशेष जांच दल में तत्कालीन डीसीपी अभय चुडासमा, पीआई राजेंद्र असारी, और एकमात्र महिला अधिकारी उषा राडा सहित कई प्रमुख पुलिस अधिकारी शामिल थे।

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