एक करोड़ की रिश्वत मांगी थी, सीबीआई ने पकड़ा
नई दिल्ली: देश के सबसे बड़े नकली और मिलावटी दवा रैकेट से जुड़े मामले में अब भ्रष्टाचार का एक नया एंगल सामने आया है। केंद्रीय जांच ब्यूरो ने दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच के एक इंस्पेक्टर को कथित तौर पर 1 करोड़ रुपये की रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया है।
आरोप है कि इंस्पेक्टर ने पुडुचेरी के करीब 5000 करोड़ रुपये के नकली दवा घोटाले के मुख्य आरोपी को सीबीआई जांच में राहत दिलाने का भरोसा देकर पैसे मांगे थे। हवाला आॅपरेटर के जरिये एक करोड़ रुपये की रकम इंस्पेक्टर को मिलनी थी।
सीबीआई के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपी की पहचान प्रदीप सिंह परमार के रूप में हुई है, जो दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की सदर्न रेंज में इंस्पेक्टर के पद पर तैनात था। इस मामले में सीबीआई ने 8 जून को भ्रष्टाचार, आपराधिक साजिश और रिश्वतखोरी से जुड़े आरोपों में एफआईआर दर्ज की। इंस्पेक्टर प्रदीप सिंह के साथ नकली दवा मामले के मुख्य आरोपी एन राजा उर्फ वल्लीअप्पन उर्फ राजशेखर और उसके कथित सहयोगी राजकुमार उर्फ मदनराज को आरोपी बनाया गया है। कुछ अज्ञात सरकारी अधिकारियों और निजी व्यक्तियों को भी जांच के दायरे में रखा गया है।
सीबीआई की शुरूआती जांच में सामने आया है कि यह रिश्वत कथित तौर पर एक बड़े सौदे का हिस्सा थी। जांच एजेंसी के मुताबिक, एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी का नाम भी जांच में सामने आया है, जिस पर आरोप है कि उसने राजा को भरोसा दिलाया कि वह सीबीआई में अपने संपर्कों के जरिए उसके केस में राहत दिलवा सकता है। इसके बदले करीब 3 करोड़ रुपये की मांग की गई थी। शुरूआत में एडवांस के तौर पर 1.5 करोड़ देने की बात हुई थी। इसी रकम की पहली किस्त के रूप में 1 करोड़ रुपये की व्यवस्था की जा रही थी।
सीबीआई के अनुसार, जब नकली दवा मामले में एजेंसी ने नया केस दर्ज किया तो मुख्य आरोपी राजा परेशान हो गया और जांच से राहत पाने के लिए संपर्क तलाशने लगा। इसी दौरान उसकी मुलाकात दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर प्रदीप सिंह से हुई। आरोप है कि सिंह ने राजा को भरोसा दिलाया कि उसके सीबीआई केस में राहत दिलाई जा सकती है, क्योंकि उसके जांच अधिकारियों और वरिष्ठ अधिकारियों तक संपर्क हैं।