HomeTrendingगिराई जाएगी कब्रिस्तान में बनी दो मंजिला मस्जिद

गिराई जाएगी कब्रिस्तान में बनी दो मंजिला मस्जिद

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बुलडोजर से खाली कराया जाएगी 1200 वर्गमीटर सरकारी जमीन, 60 पुलिसकर्मी तैनात


संभल। कब्रिस्तान की सरकारी जमीन पर बनी मस्जिद मुस्तफा कादरी को शनिवार को ध्वस्त किए जाने की तैयारी पूरी कर ली गई है। तहसीलदार कोर्ट के बेदखली आदेश के बाद प्रशासन अतिक्रमण हटाकर जमीन को कब्जा मुक्त कराएगा।

मस्जिद मुस्तफा कादरी को ध्वस्त कर करीब 1200 वर्गमीटर सरकारी जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया जाएगा। जिसमें नगर पंचायत सिरसी से चार बुलडोजर, डंपर-ट्रैक्टर और 20 सफाईकर्मियों को लगाया गया है। कार्रवाई के दौरान थाना नखासा प्रभारी, महिला थाना प्रभारी सहित विभिन्न थानों की पुलिस फोर्स के साथ 60 पीएसी जवान भी तैनात किए गए हैं। मामला नखासा क्षेत्र के कसेरुआ गांव का है।

तहसीलदार कोर्ट ने 21 अप्रैल को मस्जिद कमेटी के खिलाफ बेदखली का आदेश पारित किया था। हालांकि मस्जिद कमेटी ने जिलाधिकारी कोर्ट में अपील दाखिल की है, लेकिन तहसीलदार कोर्ट में कोई स्थगन आदेश प्रस्तुत नहीं किया गया है। ऐसे में प्रशासन ने कार्रवाई आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है।

कार्रवाई के लिए तहसीलदार धीरेंद्र कुमार सिंह ने विशेष टीम का गठन किया है। नायब तहसीलदार दीपक कुमार जुरैल को अभियान का प्रभारी बनाया गया है। राजस्व विभाग की टीम के साथ नगर पालिका संभल और नगर पंचायत सिरसी से चार जेसीबी, डंपर-ट्रैक्टर और 20 सफाईकर्मियों की मांग की गई है।

राजस्व अभिलेखों के अनुसार गाटा संख्या 409 कब्रिस्तान की जमीन है। प्रशासन का दावा है कि इसी जमीन पर लगभग 1200 वर्गमीटर क्षेत्र में मस्जिद का निर्माण किया गया है। इसी गाटा पर तीन अन्य मकान भी बने हुए हैं। इसके अलावा गाटा संख्या 410, जो खाद गड्ढे के लिए दर्ज है, उस पर करीब 600 वर्गमीटर क्षेत्र में आठ मकान बने पाए गए हैं। वहीं गाटा संख्या 411, जो वृक्षारोपण के लिए आरक्षित भूमि है, उसके एक हिस्से पर खेती किए जाने की भी बात सामने आई है।

मस्जिद के मुतवल्ली जाकिर हुसैन ने बताया कि यह मस्जिद चौधरी के जमाने की है और सैकड़ों वर्ष पुरानी है, जबकि करीब 20 से 25 साल पहले इसका पुनर्निर्माण कराया गया था। ग्रामीणों का आरोप है कि तहसीलदार कोर्ट में उनके पक्ष को ठीक से नहीं सुना गया।

21 अप्रैल 2026 को तहसीलदार न्यायालय से बेदखली का आदेश पारित होने के बाद मामला जिलाधिकारी न्यायालय में पहुंचा, लेकिन तहसीलदार न्यायालय में कोई स्थगन आदेश प्रस्तुत नहीं किया गया, जिसके बाद मस्जिद के निर्माण को हटाने की कार्रवाई की जा रही है। बताया गया कि मस्जिद के निर्माण में करीब 50 लाख रुपए से अधिक की लागत आई थी।

साक्ष्य नहीं दे सकी मस्जिद कमेटी
तहसीलदार धीरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि गांव के लोगों ने कब्रिस्तान की भूमि सुरक्षित कराने के लिए शिकायत की थी। जांच में पाया गया कि कब्रिस्तान की जमीन पर मस्जिद बनाकर कब्जा किया गया है। इसके बाद राजस्व संहिता की धारा 67 के तहत कार्रवाई शुरू की गई। उन्होंने बताया कि सुनवाई के दौरान मस्जिद कमेटी को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया गया, लेकिन ऐसा कोई दस्तावेज या साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया जिससे यह साबित हो सके कि मस्जिद निजी भूमि पर बनी है। इसके बाद न्यायालय ने बेदखली का आदेश पारित कर दिया।

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