– छात्रा की हत्या के बाद गांव में बढ़ाई निगरानी, आईडी देखकर दिया जा रहा प्रवेश।
शारदा रिपोर्टर मेरठ। रोहटा में 20 वर्षीय छात्रा की हत्या के बाद पुलिस प्रशासन अलर्ट है। युवती के गांव की ओर जाने वाले हर रास्ते की निगरानी बढ़ाई गई है। बाहरी लोगों के प्रवेश पर पाबंदी है। वहीं गांव के लोगों को भी कऊ देखने के बाद ही पुलिसकर्मी प्रवेश दे रहे हैं। जिले में एक बार फिर कपसाड़ जैसे हालात दिखाई दे रहे हैं।

रोहटा के एक गांव की रहने वाली युवती मेरठ के एक प्रतिष्ठित कॉलेज से इअ की पढ़ाई कर रही थी। इन दिनों उसका परिवार टीपीनगर थाना क्षेत्र में रह रहा था। 15 मई को छात्रा घर से परीक्षा देने निकली लेकिन वापस नहीं आई। थाने में गुमशुदगी दर्ज हो गई। 17 मई को घर से करीब 25 किलोमीटर दूर छात्रा का शव मिलने पर सनसनी फैल गई। हत्या कर शव वहां फेंका गया था।
पुलिस ने शव मोर्चरी भेजकर छानबीन शुरू की तो छात्रा पास ही के गांव के रहने वाले अंकुश नाम के युवक के साथ बाइक पर जाती सीसीटीवी कैमरों में दिखी। पुलिस ने अंकुश व उसके दो दोस्तों निशांत व अंकित के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। जल्द ही अंकुश को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भी भेज दिया।
अंकुश की गिरफ्तारी के बाद परिजनों में आक्रोश बढ़ गया। उन्होंने सीधे तौर पर पुलिस को भी बेटी की मौत का जिम्मेदार ठहरा दिया। दरअसल, अंकुश काफी समय से उनकी बेटी को परेशान करता आ रहा था। मामले का खुलासा हुआ तो राजनीतिक दलों ने कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए। वह युवती के परिवार तक पहुंचने लगे, जिसके बाद पुलिस ने गांव में सख्ती बढ़ा दी।
पुलिस कार्रवाई से परिजन संतुष्ट नहीं दिख रहे। उनकी नाराजगी बाहर ना आ पाए, इसके चलते पुलिस ने राजनीतिक दलों के साथ ही मीडिया के गांव में प्रवेश पर रोक लगा दी है। कल्याणपुर पुलिस चौकी के सामने ही बैरीगेटिंग कर दी गई है। मंगलवार को तीसरे दिन सख्ती और ज्यादा दिखाई दी। सर्किल के अंतर्गत आने वाले चारों थानों सरूरपुर, रोहटा, जानी और सरधना का फोर्स वहां तैनात रहा।
अंतिम संस्कार के बाद से लगातार राजनीतिक दल खासकर विपक्षी गांव में पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं। मंगलवार को एक किसान नेता तो खेतों में छिपते छिपाते पीड़िता के घर जा पहुंचे। पुलिस को पता चला तो खलबली मच गई। आनन फानन में पुलिस पहुंची और किसान नेता को वहां से बाहर निकाला।
युवती के गांव के भीतर हलचल है। ऐसे में एलआईयू को भी एक्टिव किया गया है। दरअसल, 1200 की आबादी वाले इस गांव में सबसे ज्यादा आबादी दलित समाज, उसके बाद मुस्लिम और फिर सैनी समाज के लोगों की है। जिस तरह परिवार प्रतिक्रिया दे रहा है, उसके बाद पुलिस को डर है कि कहीं अंदर ही अंदर तनाव ना बढ़ता चला जाए। ग्रामीणों को समझाया जा रहा है कि वह बेवजह गांव में ना घूमें।

