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Case of stray dogs: आवारा कुत्तों को लेकर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, पढ़िए पूरी खबर

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  • डॉग लवर्स, NGO की याचिकाएं खारिज, सार्वजनिक जगहों से हटाए जाएंगे, आवारा कुत्तों को लेकर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला।

नई दिल्‍ली: आवारा कुत्तों को लेकर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला आया है। कोर्ट ने आवारा कुत्तों को पब्लिक प्लेस से हटाने के आदेश में बदलाव से इनकार करते हुए डॉग लवर्स और NGO की याचिकाओं को खारिज कर दिया। कहा कि कुत्‍तों के काटने की घटनाओं के मामलों पर राज्य चुप कैसे बैठ सकते हैं? यहां तक की इंटरनेशनल ट्रेवलर भी कुत्तों का शिकार हुए हैं।

 

Supreme Court is big decision on stray dogs

 

Case of stray dogs: अदालत ने डॉग लवर्स और सभी एनजीओ की याचिकाएं खारिज करते हुए साफ कर दिया है कि सात नवंबर के आदेश में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। आवारा कुत्‍तों को लेकर राज्‍यों द्वारा उठाए गए कदमों को भी सुप्रीम कोर्ट ने नाकाफी बताया। आवारा कुत्‍तों को लेकर फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “देशभर में कुत्तों के काटने की घटनाओं को नजरअंदाज नहीं कर सकता, जहां बच्चों को काटा गया गया। यह कोर्ट यह नहीं भूल सकता कि ABC फ्रेमवर्क 2001 में शुरू किया गया था। आवारा कुत्तों की बढ़ती आबादी के हिसाब से संसाधनों को बढ़ाने और उसकी मात्रा तय करने की कोशिशों की कमी साफ़ तौर पर देखी जा रही है। बिना प्लानिंग के नसबंदी और वैक्सीनेशन ड्राइव चलाए गए। इससे आवारा कुत्‍तों की आबादी को कंट्रोल करने का मकसद पूरा नहीं होता।”

पागल, खतरनाक कुत्‍तों को दयामृत्‍यु…

कोर्ट ने आदेश दिया कि इंसानी जान और सुरक्षा को होने वाले खतरे को रोकने के लिए पागल, बीमार या खतरनाक/आक्रामक कुत्तों को दयामृत्यु ( यूथेनेशिया) दी जा सकती है। कोर्ट ने कहा कि ऐसे उपाय किए जाएं, जो कानूनी तौर पर मंज़ूर हों, जिसमें दयामृत्यु भी शामिल है। उन मामलों में जहां कुत्ते पागल हों, लाइलाज बीमारी से पीड़ित हों, या साफ़ तौर पर खतरनाक/आक्रामक हों, ताकि इंसानी जान और सुरक्षा को होने वाले खतरे को प्रभावी ढंग से रोका जा सके।

कोर्ट ने आवारा कुत्तों को लेकर और दिशानिर्देश जारी किए-

1. राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को ABC फ्रेमवर्क के लिए ज़रूरी संशाधनों को बढ़ाने और बेहतर बनाने के लिए निर्णायक, समन्वित और समय-सीमा के भीतर कदम उठाने होंगे।

2. हर ज़िले में कम से कम एक पूरी तरह से काम करने वाला ABC सेंटर बनाना सुनिश्चित करें, जो ज़रूरी इंफ्रास्ट्रक्चर, प्रशिक्षित कर्मचारियों, सर्जिकल सुविधाओं और सहायक लॉजिस्टिक्स से पूरी तरह लैस हो।

3. हर ज़िले की जनसंख्या घनत्व और भौगोलिक विस्तार को ध्यान में रखते हुए, ABC सेंटरों की संख्या बढ़ाने के बारे में फ़ैसला लिया जाए।

4. राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इन निर्देशों को बिना किसी देरी के, अक्षरशः और भावना के साथ लागू करने के लिए सभी ज़रूरी उपाय करने होंगे।

4. अधिकारियों को इस कोर्ट के निर्देशों का विस्तार अन्य सार्वजनिक जगहों तक करने का फ़ैसला लेना होगा, जहां लोगों की भारी भीड़ और सार्वजनिक उपयोग होता है – जैसे कि सार्वजनिक सभा और आवागमन के स्थान, ताकि जनता के लिए एक सुरक्षित और महफ़ूज़ माहौल सुनिश्चित किया जा सके।

5. ऐसा फैसला जमीनी हकीकतों, सार्वजनिक सुरक्षा को होने वाले जोखिम और ऐसी जगहों की कार्यप्रणाली का सावधानीपूर्वक आकलन करने के बाद ही लिया जाए।

6. राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सभी सरकारी चिकित्सा सुविधाओं में एंटी-रेबीज़ वैक्सीन और इम्यूनोग्लोबुलिन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करनी होगी, और कुत्ते के काटने के मामलों से निपटने के लिए एक प्रभावी सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रतिक्रिया तंत्र स्थापित करना होगा।

7. NHAI, संबंधित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के समन्वय से, राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे पर आवारा कुत्तों और अन्य जानवरों की मौजूदगी से निपटने के लिए एक व्यापक और समय-सीमा वाला तंत्र तैयार करेगा और उसे लागू करेगा। इसमें आवारा पशुओं और अन्य जानवरों को सुरक्षित रूप से संभालने और उन्हें दूसरी जगह ले जाने के लिए विशेष परिवहन वाहनों की तैनाती, उचित होल्डिंग और आश्रय सुविधाओं का निर्माण या उन्हें चिन्हित करना, और सुरक्षित संचालन व स्थानांतरण के लिए पशु कल्याण संगठनों के साथ उचित व्यवस्था करना शामिल है।

संविधान ऐसे समाज की कल्पना नहीं करता

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “राज्य की जिम्मेदारियों के लिए फ्रेमवर्क बनाना जरूरी है। गरिमा के साथ जीने के अधिकार में कुत्ते के काटने के हमले से होने वाले नुकसान के डर के बिना आज़ादी से जीने का अधिकार शामिल है। राज्य चुपचाप दर्शक बना नहीं रह सकता. सुप्रीम कोर्ट उन कड़वी ज़मीनी हकीकतों से अनजान नहीं रह सकता जहां बच्चे, इंटरनेशनल ट्रैवलर, बुज़ुर्ग कुत्ते के काटने की घटनाओं का शिकार हुए हैं। संविधान ऐसे समाज की कल्पना नहीं करता जहां बच्चे, बुज़ुर्ग लोग सिर्फ शारीरिक ताकत के भरोसे ज़िंदा रहें। इस अदालत के निर्देशों का किसी भी प्रकार से पालन न करना गंभीरता से लिया जाएगा। निर्देशों का पालन न करने पर राज्यों के विरुद्ध अवमानना ​​की कार्यवाही, अनुशासनात्मक कार्यवाही तथा टॉर्ट जवाबदेही की कार्यवाही शुरू की जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 22 अगस्त और 7 नवंबर को जारी किए गए निर्देशों के बावजूद, रिकॉर्ड में रखी गई जानकारी से पता चलता है कि निर्देशों को ज़मीनी स्तर तक नहीं पहुंचाया गया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन न करने को गंभीरता से लिया जाएगा। पालन न करने पर राज्यों के खिलाफ अवमानना ​​की कार्रवाई, अनुशासनात्मक कार्रवाई और ज़िम्मेदारी ना निभाने की कार्रवाई शुरू की जाएगी।

कुत्तों के काटने की बार-बार होने वाली घटनाएं गंभीर खामियों का संकेत

सुप्रीम कोर्ट ने पूछा, “कुत्‍तों के काटने की घटनाओं के मामलों पर राज्य चुप कैसे बैठ सकते हैं? यहां तक की इंटरनेशनल ट्रेवलर भी कुत्तों का शिकार हुए हैं। गरिमा के अधिकार में Freely Move करना भी शामिल। हमें उन रिपोर्टों की जानकारी है, जिनसे पता चलता है कि हवाई अड्डों, रिहायशी इलाकों, शहरी केंद्रों आदि में कुत्तों के काटने की घटनाएं हो रही हैं। देश के सबसे व्यस्त हवाई अड्डों (IGI) पर कुत्तों के काटने की बार-बार होने वाली घटनाएं ही यह दर्शाती हैं कि वहां व्यवस्था में गंभीर खामियां हैं। सूरत में एक जर्मन यात्री को कुत्ते ने काट लिया था। इस तरह की घटनाओं से शहरी प्रशासन पर जनता का भरोसा बुरी तरह प्रभावित होता है।”

राजस्थान के श्री गंगानगर में एक महीने में कुत्तों के काटने की 1084 घटनाएं

सुप्रीम कोर्ट ने एयरपोर्ट पर भी डॉग बाइट की घटनाओं का हवाला दिया। कोर्ट ने कहा, “यह अदालत यह कहने पर मजबूर है कि ABC फ्रेमवर्क को प्रभावी ढंग से लागू करने में घोर निष्क्रियता के कारण यह समस्या और भी गंभीर हो गई है। आवारा कुत्तों के काटने की घटनाएं लगातार हो रही हैं। रिपोर्टों से पता चलता है कि यह समस्या अब बेहद चिंताजनक स्तर तक पहुंच गई है। अकेले राजस्थान के श्री गंगानगर शहर में ही एक महीने में कुत्तों के काटने की 1084 घटनाएं दर्ज की गईं. रिपोर्टों के अनुसार, छोटे बच्चों को गंभीर चोटें आईं, जिनमें उनके चेहरे पर कुत्तों द्वारा हमला करना आदि शामिल है। तमिलनाडु में साल के पहले चार महीनों में ऐसी लगभग 2 लाख घटनाएं दर्ज की गईं।

आवारा कुत्तों का आतंक चिंताजनक

आवारा कुत्‍तों के मुद्दे पर राज्‍य सरकारों को फटकार लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “अगर राज्यों ने दूर की सोच के साथ काम किया होता, तो मौजूदा हालात इतने खतरनाक नहीं होते। आवारा कुत्तों का आतंक चिंताजनक स्तर तक पहुंच गया है। राज्यों में स्थिति चिंताजनक है।” सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान और गुजरात समेत राज्यों का डेटा दिया।

जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एनवी अंजारिया की बेंच ने 29 जनवरी को सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। इस दौरान राज्यों, नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया और एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया ने अपनी दलीलें रखी थीं।

सुप्रीम कोर्ट ने NHAI को दिये थे निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि जिन कुत्तों में रेबीज नहीं है और जो आक्रामक नहीं हैं, उन्हें नसबंदी और टीकाकरण के बाद उसी इलाके में छोड़ा जा सकता है, जहां से पकड़ा गया था। बाद में मामले का दायरा पूरे देश तक बढ़ा दिया गया, 7 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम आदेश में राज्यों और एनएचएआई को हाईवे, अस्पताल, कॉलेज, स्कूल और दूसरे संस्थानों के आसपास से आवारा जानवर हटाने को कहा था।

कुत्‍ता काटे तो किसकी जिम्‍मेदारी?

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने कहा था कि आवारा कुत्तों के किसी हमले में चोट या मौत होती है, तो उस क्षेत्र के नगर निकाय के साथ ही कुत्‍तों को खाना खिलाने वालों की भी जिम्मेदारी तय की जा सकती है। ऐसा नहीं हो सकता कि कोई शख्‍स किसी कुत्‍ते को रोजाना खाना खिलाए, लेकिन जब वो किसी शख्‍स को काट ले तो उसकी कोई जिम्‍मेदारी न हो। कोर्ट ने कहा था, “हम इस मामले में जिम्मेदारी तय करने से पीछे नहीं हटेगा, क्योंकि मौजूदा व्यवस्था में स्थानीय प्रशासन की विफलता सामने आई है।” सुप्रीम कोर्ट ने असम में कुत्तों के काटने के आंकड़ों पर भी हैरानी जताई और कहा कि इन आंकड़ों को देखिए। ये चौंकाने वाले हैं, 2024 में 1.66 लाख घटनाएं हुईं और 2025 में (केवल जनवरी में ही) 20,900 घटनाएं दर्ज की गईं। ये बेहद भयावह है। कोर्ट ने अस्पष्ट बयान देने वाले राज्यों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी दी।

2025 के मुख्य निर्देश

1. स्टरलाइजेशन (नसबंदी) और वैक्सीनेशन जरूरी- नगर निगमों को आवारा कुत्तों को पकड़कर उनकी नसबंदी, टीकाकरण और डिवार्मिंग करानी होगी।

2. नसबंदी के बाद उसी इलाके में छोड़ा जाएगा- सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सामान्य स्वस्थ कुत्तों को नसबंदी और टीकाकरण के बाद उसी क्षेत्र में वापस छोड़ा जाए जहां से उन्हें पकड़ा गया था।

3. आक्रामक या रेबीज़ वाले कुत्ते वापस नहीं छोड़े जाएंगे. जो कुत्ते रेबीज़ संक्रमित हों या अत्यधिक आक्रामक व्यवहार करते हों, उन्हें अलग शेल्टर/पाउंड में रखा जाएगा।

4. सार्वजनिक स्थानों पर खाना खिलाने पर रोक। कोर्ट ने कहा कि सड़क, गली या सार्वजनिक जगहों पर आवारा कुत्तों को खाना नहीं खिलाया जा सकता।

5. निर्धारित फीडिंग जोन बनाए जाएं. हर नगर निगम वार्ड में कुत्तों के लिए अलग फिडिंग जोन बनाने के निर्देश दिए गए.. वहां बोर्ड और व्यवस्था होगी।

6. स्कूल, अस्पताल, बस अड्डे आदि से हटाने के निर्देश। बाद के आदेशों में कोर्ट ने कहा कि स्कूल, अस्पताल, रेलवे स्टेशन, खेल परिसर जैसी सार्वजनिक जगहों से आवारा कुत्तों को हटाया जाए।

7. राष्ट्रीय नीति बनाने के आदेश – कोर्ट ने केंद्र और राज्यों को पूरे देश के लिए एक समान आवारा कुत्ते प्रंबंधन नीति तैयार करने को कहा था।

कब और कैसे शुरू हुआ मामला?

आवारा कुत्‍तों से जुड़ा मामला 28 जुलाई 2025 को शुरू हुआ था। सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में आवारा कुत्तों के हमलों और उनसे होने वाली मौतों पर स्वतः संज्ञान लिया था। इस दौरान आवारा कुत्‍तों के काटने के कई वीडियो वायरल हो रहे थे। इन वीडियो में आवारा कुत्‍ते बच्‍चे, बुर्जुगों और महिलाओं पर हमला करते हुए नजर आ रहे हैं, 11 अगस्त 2025 को कोर्ट ने दिल्ली एनसीआर में से 8 हफ्ते के भीतर सभी आवारा कुत्तों को पकड़कर शेल्टर होम में भेजने का आदेश दिया था। इसके बाद देशभर के डॉग लवर्स ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिये थे। दिल्‍ली में इंडिया गेट के आसपास तक डॉग लवर्स विरोध प्रदर्शन करने पहुंच गए थे। इसके बाद 22 अगस्त 2025 को कोर्ट ने अपने आदेश में बदलाव किया था।

 

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