– 1831 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी,
– जनता के मुद्दों पर बात न होने पर एआईएमआईएम के पार्षदों का वॉकआउट।
शारदा रिपोर्टर मेरठ। मेरठ। वही हुआ जिसका अनुमान लगाया जा रहा था। चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी के नेताजी सुभाष चन्द्र बोस प्रेक्षागृह में सोमवार को हुई जोरदार हंगामे के बीच नगर निगम की कार्यकारिणी बैठक की वंदे मातरम गीत से शुरूआत की गई। जिसके बाद शहर के विकास कार्यों को लेकर चर्चा होने लगी।

इस दौरान महापौर हरिकांत अहलूवालिया ने बताया कि 1831 करोड़ का मूल बजट निगम की कार्यकारिणी बैठक में पास हो गया था। नियमानुसार बोर्ड बैठक में भी इसे पास कराना अनिवार्य है। बोर्ड बैठक में मूल बजट के साथ पार्षदों के अन्य प्रस्ताव पर भी चर्चा की।
पार्षदों और जागरूक नागरिकों ने बैठक के सीमित एजेंडे पर गंभीर सवाल उठाए। आरोप लगाया कि, केवल बजट की औपचारिकता पूरी कर बैठक को जल्द से जल्द समाप्त कर दिया गया। जबकि, महानगर की ज्वलंत समस्याओं पर कोई चर्चा ही नहीं की।
पार्षद फजल करीम और अन्य पार्षदों ने आरोप लगाया कि हैरानी की बात है कि, इस बार एजेंडे में उस पारंपरिक कॉलम को हटा दिया गया है, जिसमें मेयर की अनुमति से अन्य मुद्दों पर चर्चा का प्रावधान होता है। विपक्ष और पार्षदों का मानना है कि, एजेंडे से ‘अन्य मुद्दों’ वाले कॉलम को हटाना सोची-समझी रणनीति है।
जबकि, महानगर में सफाई, जलभराव और जर्जर सड़कों जैसी कई गंभीर समस्याएं हैं, जिन पर चर्चा होना अनिवार्य था। अधिकारियों की मंशा है कि, सदन में जनहित के मुद्दों पर कोई चर्चा ही न हो। इस तरह की बोर्ड बैठक का कोई औचित्य नहीं है।
सेंट्रल मार्केट के विस्थापित दुकानदारों को मिले दुकान: सेंट्रल मार्केट विस्थापितों को दुकान देने की मांग कांग्रेस नेताओं ने कहा कि सेंट्रल मार्केट ध्वस्तीकरण के बाद विस्थापित व्यापारियों से किए गए वादे अभी तक पूरे नहीं हुए हैं। उन्होंने मांग की कि नगर निगम के नए कार्यालय परिसर में इन विस्थापितों को दुकानें आवंटित करने का प्रस्ताव तत्काल पास किया जाए। कांग्रेस ने गाजियाबाद की तर्ज पर मेरठ में भी हाउस टैक्स में 10 प्रतिशत कटौती की मांग की। साथ ही शहर की सफाई व्यवस्था सुधारने के लिए 400 नए सफाई कर्मियों की भर्ती और उनके मानदेय में वृद्धि का प्रस्ताव भी बोर्ड बैठक में लाने की बात कही गई।
म्यूटेशन का आदेश भी लागू किया जाए: व्यापारियों को सीलिंग से राहत की मांग कांग्रेस नेताओं ने कहा कि व्यापारियों को सीलिंग से राहत देने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं, केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा। उन्होंने जरूरत पड़ने पर व्यापारियों को सुप्रीम कोर्ट तक कानूनी सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा भी दिया। इसके अलावा 9 मई 2025 के नामांतरण (म्यूटेशन) शासनादेश को तत्काल लागू करने की मांग भी रखी गई।


