– हाईकोर्ट जज ने कहा ये झकझोरने वाला अपराध, दोषी सजा-ए-मौत के काबिल।
प्रयागराज। आठ साल की बच्ची से रेप के बाद हत्या करने वाले को सोमवार को फांसी की सजा सुनाई गई। कोर्ट ने उस पर 25 हजार रुपए का जुमार्ना भी लगाया है। यह फैसला पॉक्सो कोर्ट के जज विनोद कुमार चौरसिया ने सुनाया। जज ने कहा मासूम के साथ हुई बर्बरता समाज के लिए खतरा है। मामला अत्यंत क्रूर, अमानवीय और समाज को झकझोरने वाला है। आरोपी के सुधार की संभावना शून्य है। लिहाजा दोषी सजा-ए-मौत के काबिल है। कोर्ट ने वारदात के 18 महीने के भीतर फैसला सुनाया है। पांच दिन पहले आरोपी को दोषी करार दिया गया था। मामला सोरांव थाना क्षेत्र का है।
तीन अक्टूबर 2024 को 26 साल के आरोपी मुकेश पटेल ने दुर्गा पूजा देखकर लौट रही बच्ची का अपहरण किया था। बाद में उसकी हत्या कर दी थी। घटना के 12 दिन बाद पुलिस ने आरोपी को मुठभेड़ में गिरफ्तार किया था।

ये था पूरा मामला-
लोक अभियोजक (सरकारी वकील) विनय कुमार त्रिपाठी ने बताया कि 3 अक्टूबर 2024 को बच्ची शिवगढ़ चौराहे के पास दुर्गा पूजा पंडाल में गई थी। शाम 6:30 बजे वह घर लौट रही थी, तभी लापता हो गई।
अगले दिन 4 अक्टूबर को उसका शव गांव के किनारे धान के खेत में मिला। शव पर गंभीर चोटों के निशान थे। हाथ-पैर और दांत टूटे हुए थे। मुंह से खून और झाग निकल रहा था और निजी अंग बुरी तरह जख्मी थे।
बच्ची की मां की शिकायत पर अज्ञात आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। पोस्टमार्टम में रेप के बाद हत्या की पुष्टि हुई। पुलिस जांच में सामने आया कि घटना वाली शाम आरोपी मुकेश बच्ची को साइकिल पर बैठाकर ले जाता दिखाई दिया था।
12 दिन बाद एनकाउंटर में लगी थी गोली
सरकारी वकील ने बताया कि उस वक्त पुलिस का दावा था कि आरोपी ने पहले मासूम से दुष्कर्म किया और फिर पहचान छिपाने के लिए उसके चेहरे पर ताबड़तोड़ वार किए। उसके दांत तोड़ दिए, चेहरे पर चोट पहुंचाई और दोनों हाथ भी तोड़ दिए। 16 अक्टूबर को पुलिस ने मुठभेड़ में आरोपी को गिरफ्तार किया था। गंगानगर क्षेत्र में पुलिस ने उसे घेरा तो वह फायरिंग कर भागने लगा। जवाबी फायरिंग में उसके पैर में गोली लगी थी।
दिसंबर 2024 में दाखिल हुई चार्जशीट
सरकारी वकील ने बताया कि जांच के बाद पुलिस ने 10 दिसंबर 2024 को चार्जशीट (आरोप पत्र) दाखिल की थी। 21 दिसंबर 2024 को कोर्ट ने आरोप तय किए। 26 मार्च 2026 को आरोपी को दोषी करार दिया गया था। प्रयागराज के जिला एवं सत्र न्यायालय में 49 वर्षों में यह फांसी की 10वीं सजा है।

