– आरोपी ने शंकराचार्य अविमुक्तेवरानंद के खिलाफ पैरवी बंद करने की दी धमकी।
प्रयागराज। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर यौन उत्पीड़न की एफआईआर कराने वाले आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज को फिर से जान से मारने की धमकी दी गई है। आशुतोष महाराज ने बताया कि अंजान नंबर से कॉल करने वाले ने कहा- शंकराचार्य के केस की पैरवी बंद कर दो वरना बम से उड़ा देंगे। तुम्हे और तुम्हारे वकील सौरभ गुप्ता को उठवा लेंगे। धमकी की शिकायत के बाद शुक्रवार शाम को शामली में आशुतोष ब्रह्मचारी के घर पुलिस टीम पहुंची और उनके बयान दर्ज किए।

श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट मथुरा के अध्यक्ष आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज पुलिस को तहरीर देकर कहा कि उन्होंने मुकदमा अपराध संख्या 0058/2026 थाना झूंसी, प्रयागराज में दर्ज कराया है। वे वादी (शिकायतकर्ता) हैं।
इस केस में अधिवक्ता के जरिए 25 मार्च को सुप्रीम कोर्ट नई दिल्ली में एक विशेष अनुमति याचिका (आपराधिक) दाखिल किया है। इसके बाद उनके मोबाइल नंबर पर एक अज्ञात व्यक्ति ने फोन कर गंभीर धमकी दी। कहा-उपरोक्त विशेष अनुमति याचिका में पैरवी करता हूं अथवा उसे वापस नहीं लेता हूं, तो मुझे एवं मेरे अधिवक्ता सौरभ अजय गुप्ता को बम से उड़ाने दिया जाएगा। फोन करने वाले ने कहा कि उठा ले जाएंगे।
आशुतोष महाराज का कहना है कि धमकी से मेरे एवं मेरे अधिवक्ता के जीवन एवं सार्वजनिक सुरक्षा के लिए अत्यंत गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है। यह न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने का आपराधिक प्रयास है।
मामला सामने आने के बाद एसएसपी शामली नरेंद्र प्रताप सिंह के निर्देश पर थाना प्रभारी थाना कांधला सतीश कुमार, इंचार्ज नरेंद्र वर्मा फोर्स लेकर आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज से मिले और मामले की जांच शुरू कर दी।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की जमानत याचिका मंजूर कर ली है। केस दर्ज कराने वाले आशुतोष महाराज पर कई सवाल उठे हैं। कोर्ट ने पाया कि पीड़ित यानी बटुकों ने 18 जनवरी की घटना बताई, जबकि आशुतोष महाराज ने 24 जनवरी की। पीड़ित बच्चों को प्रॉपर कस्टडी में क्यों नहीं लिया गया।
किसी बच्चे के साथ कोई घटना होती है, तो वह सबसे पहले अपने परिवार या मां-पिता को बताता है। बटुक आशुतोष महाराज को पहले से नहीं जानते थे। फिर उन्होंने सबसे पहले आशुतोष महाराज को घटना क्यों बताई? कोर्ट ने कहा- ऐसे में घटना और एफआईआर को सावधानीपूर्वक देखना होगा, कहीं ये झूठा केस तो नहीं है।

