– बच्चियों और महिलाओं से हो रही दुष्कर्म की घटनाओं पर हेल्पिंग यूथ फाउंडेशन ने किया प्रदर्शन।
शारदा रिपोर्टर मेरठ। महिलाओं एवं बच्चियों के साथ हो रही दुष्कर्म की घटनाओं पर कठोर कार्रवाई करने की मांग को लेकर शुक्रवार को हेल्पिंग यूथ फाउंडेशन के दर्जनों सदस्यों ने कमिश्नरी चौराहे पर प्रदर्शन किया।

इस दौरान उन्होंने भारत सरकार को संबोधित ज्ञापन डीएम कार्यालय पर सौंपते हुए बच्चियों और महिलाओं के साथ दुष्कर्म करने वालों पर सख्त से सख्त कार्रवाई करने की मांग की। प्रदर्शन कर रहे सदस्यों ने बताया कि, राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की नई रिपोर्ट बताती है कि, भारत में बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों और अपहरण के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इसमें नाबालिग लड़कियों की संख्या चिंताजनक है। एनसीआरबी की नई रिपोर्ट बताती है कि भारत में बच्चों के खिलाफ अपराधों में चिंताजनक रूप से वृद्धि हो रही है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की नई रिपोर्ट बताती है कि भारत में बच्चों के खिलाफ अपराधों में लगातार वृद्धि हो रही है. वर्ष 2023 में कुल 1,77,335 मामले दर्ज किए गए। यह संख्या एक साल पहले के आंकड़ों की तुलना में लगभग नौ फीसदी अधिक है। जबकि, साल 2022 में बच्चों के खिलाफ अपराधों के कुल 1,62,449 मामले दर्ज किए गए थे।
रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकांश अपराधों में आरोपी बच्चों के जानने-पहचानने वाले लोग ही थे। सबसे अधिक मामले अपहरण और पॉक्सो अधिनियम के तहत दर्ज किए गए हैं। अपहरण की घटनाएं, बच्चों के खिलाफ कुल अपराधों का 45.05 फीसदी हिस्सा हैं। वहीं 67,694 मामले पॉक्सो अधिनियम से संबंधित अपराधों में दर्ज हुए हैं, जो कि कुल मामलों का 38.17 फीसदी है। इनमें लड़कियों के साथ हुए अपराध अधिक हैं।
जबकि, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में अपराध दर सबसे अधिक पाई गई है। उत्तर प्रदेश में महिलाओं एवं मासूम बच्चियों के साथ दुष्कर्म की बढ़ती घटनाएं अत्यंत गंभीर एवं चिंताजनक हैं। ऐसी जघन्य घटनाएं समाज को झकझोर रही है और कानून व्यवस्था पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा कर रही हैं।
यदि इन अपराधों पर समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो अपराधियों के हौसले और बुलंद होंगे और यह अपराधी बिना किसी डर के ऐसी घिनौनी घटनाओं को अंजाम देते रहेंगे। उन्होंने कहा कि, इन्हीं सब बातों को देखते हुए हेल्पिंग जस्टिस फाउंडेशन यह मांग करती है कि ऐसे मामलों में तुरंत गिरफ्तारी, फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई, दोषियों को कठोरतम सजा और पीड़ित परिवार को सुरक्षा एवं सहायता सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश भर में सख्त निर्देश जारी किए जाएं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लग सके और प्रदेश की बेटियां की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।


