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मानसून पर इस बार ‘अल नीनो’ का खतरा

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– भीषण गर्मी के लिए हो जाएं तैयार, डब्लूएमओ ने मानसून प्रभावित होने की कही बात

नई दिल्ली। क्या इस बार भीषण गर्मी पड़ने वाली है? विश्व मौसम विज्ञान संगठन की मानें तो इसके पूरे आसार नजर आ रहे। डब्लूएमओ ने पूवार्नुमान जताया है कि अल नीनो से भारत का मानसून प्रभावित हो सकता है। आने वाले महीने और भी गर्म हो सकते हैं। ऐसे में हमें इस बार भीषण गर्मी के लिए तैयार रहने की जरूरत है।

 

 

विश्व मौसम विज्ञान संगठन के मुताबिक, इस वर्ष के अंत में अल नीनो का खतरा मंडरा रहा है। इसका असर भारत के मानसून पर पड़ने के आसार हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का ये भी कहना है कि इस समय निश्चित रूप से कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। ऐसा इसलिए क्योंकि अल नीनो वर्ष में आमतौर पर मानसून के दौरान बारिश पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं।

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) के अपडेट में यह भी कहा गया है कि अलग-अलग जलवायु फैक्टर्स के कारण मार्च से मई के दौरान औसत से अधिक लैंड सरफेस तापमान में बढ़ोतरी के वैश्विक संकेत मिल रहे हैं। इसका असर भारत में पहले से ही महसूस किया जा रहा है। देश के कई हिस्सों में लू की स्थिति बनने लगी है, आगे ये और भी गंभीर हो सकती है।

इस बीच, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने भविष्यवाणी की है कि अगले तीन दिनों के दौरान जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में दिन का तापमान सामान्य से 5-7 डिग्री सेल्सियस अधिक रहने की संभावना है। दिल्ली-एनसीआर सहित उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों, गुजरात और मध्य प्रदेश में यह तापमान 4-6 डिग्री सेल्सियस अधिक रहेगा।

अगले पांच दिनों के दौरान दक्षिणपूर्वी प्रायद्वीपीय भारत में दिन का तापमान सामान्य से 2-3 डिग्री सेल्सियस अधिक रहने का पूवार्नुमान है। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (टङ्मएर) के पूर्व सचिव माधवन राजीवन ने ळडक को बताया कि अल नीनो का असर सीजन के दूसरे हिस्से में डेवलप होने की संभावना है। मौजूदा पूवार्नुमानों के अनुसार, यह एक मॉडरेट अल नीनो हो सकता है। हालांकि, इस समय के पूवार्नुमानों में काफी अनिश्चितताएं हैं।

अल नीनो को लेकर क्या है पूवार्नुमान

अल नीनो मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह के तापमान में बड़े पैमाने पर होने वाली बढ़ोतरी को संदर्भित करता है। ये उष्णकटिबंधीय वायुमंडलीय परिसंचरण में परिवर्तन के साथ होता है, जिसमें हवाओं का दबाव और बारिश के पैटर्न में परिवर्तन शामिल है। इसमें आमतौर पर ला नीना के विपरीत प्रभाव भी होते हैं, जो भारतीय उपमहाद्वीप में अच्छी मानसूनी बारिश से जुड़े होते हैं।

वैश्विक तापमान को लेकर हटड का अपडेट

विश्व मौसम विज्ञान संगठन की महासचिव सेलेस्टे साउलो ने कहा कि डब्ल्यूएमओ आने वाले महीनों में स्थितियों पर बारीकी से नजर रखेगा ताकि जरूरी फैसला लेने में मदद मिल सके। 2023-24 में आया हालिया अल नीनो अब तक के पांच सबसे शक्तिशाली अल नीनो में से एक था। इसने 2024 में दर्ज किए गए रिकॉर्ड वैश्विक तापमान में अहम भूमिका निभाई।

 

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