News Update: फिल्म जगत के महान अभिनेता धर्मेंद्र का जाट समाज और अखिल भारतीय जाट महासभा से रिश्ता हमेशा भावनात्मक रहा। किसान परिवार में जन्मे धर्मेंद्र गर्व से कहा करते थे कि फिल्मों से पहले उन्हें खेती ही सबसे प्रिय थी और आगे भी वे खुद को किसान के रूप में ही देखना चाहते थे। उनकी यही सादगी उन्हें समाज से विशेष रूप से जोड़ती थी।

इस जुड़ाव की सबसे मजबूत मिसाल 9 मार्च 2007 को दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में दिखी, जहाँ महासभा के शताब्दी अधिवेशन में धर्मेंद्र ने भावुक होकर कहा था—“मैं किसान का बेटा हूँ, और किसान बनकर ही रहना चाहता हूँ।” उनके इस संबोधन ने पूरे स्टेडियम को तालियों से गूंजा दिया।
उस पल को याद करते हुए अखिल भारतीय जाट महासभा, मेरठ मंडल अध्यक्ष चौधरी सत्येन्द्र सिंह तोमर बताते हैं कि धर्मेंद्र की सादगी और समाज के प्रति अपनापन ने कार्यक्रम को ऐतिहासिक बना दिया। तोमर कहते हैं, “उनकी विनम्रता ने हर दिल को छू लिया। वे बड़े सितारे होकर भी पूरी तरह हमारी मिट्टी से जुड़े थे।”
धर्मेंद्र का यह आत्मीय संबंध आज भी जाट समाज की स्मृतियों में जीवित है और आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जुड़े रहने की प्रेरणा देता रहेगा।


