देहरादून। इंडियन मिलिट्री एकेडमी (आईएमए) में 158वीं पासिंग आउट परेड (पीओपी) और पिपिंग सेरेमनी हुई। जिसमें परिजनों और सैन्य अधिकारियों ने कैडेट्स के कंधों पर स्टार लगाकर उन्हें भारतीय सेना में कमीशंड अधिकारी बनने की बधाई दी।
इसके बाद आईएमए परिसर में जश्न का माहौल देखने को मिला। अधिकारियों ने अपने परिजनों और साथियों के साथ खुशी मनाई। किसी ने साथियों को कंधों पर उठाया तो किसी ने हवा में उछालकर उत्साह जताया। परेड में कुल 515 कैडेट्स ने प्रशिक्षण पूरा कर भारतीय सेना में कमीशंड अधिकारी के रूप में कदम रखा। इनमें 481 भारतीय और 34 विदेशी कैडेट्स शामिल हैं।
समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहीं। उनके साथ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह भी उपस्थित रहे। समीक्षा अधिकारी के रूप में राष्ट्रपति ने परेड का निरीक्षण किया, कैडेट्स की सलामी ली और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कैडेट्स को स्वॉर्ड आॅफ आॅनर तथा अन्य पदक प्रदान किए।
इसके बाद कैडेट्स ने चेटवुड भवन के सामने स्थित ऐतिहासिक ‘अंतिम पग’ को पार किया। इस रेखा को पार करते ही उनका कैडेट जीवन समाप्त हो गया और वे भारतीय सेना के कमीशंड अधिकारी बन गए। अंतिम पग के दौरान हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा भी की गई।
140 करोड़ देशवासियों के भरोसे की जिम्मेदारी : राष्ट्रपति ने कहा कि नव-नियुक्त अधिकारी केवल सेना का हिस्सा नहीं, बल्कि देश की संप्रभुता, एकता और अखंडता के प्रहरी हैं। उनके कंधों पर 140 करोड़ भारतीयों के विश्वास और सुरक्षा की जिम्मेदारी है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे हमेशा याद रखें कि राष्ट्र सेवा ही उनका सर्वोच्च धर्म और कर्तव्य है।
9 महिला कैडेट्स ने रचा इतिहास : राष्ट्रपति ने आईएमए के इतिहास में पहली बार 9 महिला कैडेट्स के पास आउट होने को ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि यह केवल भारतीय सेना के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का क्षण है। यह महिला-नेतृत्व वाले विकास की दिशा में भारत की बढ़ती भागीदारी और बदलती सोच का प्रतीक है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में और अधिक युवा महिलाएं सेना में नेतृत्व की भूमिका निभाएंगी।
राष्ट्रपति ने कहा कि आज दुनिया तेजी से बदल रही है। नई तकनीक, साइबर खतरों, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बदलते युद्ध कौशल के दौर में भारतीय सेना को हर समय भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहना होगा। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे नई परिस्थितियों के अनुरूप खुद को ढालने और लगातार सीखते रहने की आदत विकसित करें।
राष्ट्रपति ने युवा अधिकारियों से केवल सैन्य कौशल तक सीमित न रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि एक अच्छे अधिकारी को साहसी निर्णय लेने वाला, नैतिक मूल्यों का पालन करने वाला और आजीवन सीखने वाला नेता होना चाहिए। कठिन परिस्थितियों में सही निर्णय लेने की क्षमता ही एक अधिकारी की सबसे बड़ी पहचान होती है।