शारदा रिपोर्टर मेरठ। भारतीय नववर्ष सिद्धार्थ विक्रम संवत-2082 की प्रथम प्रभात पर जिमखाना मैदान में जन चेतना महायज्ञ कराया गया। वेद मंत्रों के उच्चारण के साथ 521 यज्ञ कुंडों में आहुतियां दी गईं। इस आयोजन के माध्यम से नववर्ष में सभी प्राणियों और विश्व के कल्याण की कामना की गई।
सर्वप्रथम सुशोभित मंच से मेरठ पब्लिक स्कूल की छात्राओं ने ईश वंदना की। ओम है जीवन हमारा ओम प्राण आधार है… जैसे भजन प्रस्तुत किए गए। मुख्य संयोजक राजेश सेठी ने कहा कि यज्ञ सर्वश्रेष्ठ कर्म है। यज्ञ मानव के समस्त दुखों का निवारण कर समग्र एश्वर्य प्रदान करता है। उन्होंने चैत्र प्रतिपदा दिवस का ऐतिहासिक महत्व बताया। उन्होंने इस दिन को सांस्कृतिक महापर्व के रूप में मनाने का अनुरोध किया।
सेठी ने बताया कि आज के दिन ही संवत 1932 में महर्षि स्वामी दयानंद सरस्वती ने आर्य समाज की स्थापना की थी। आर्य समाज सनातन वैदिक धर्म एवं संस्कृति की रक्षा कर अपने दायित्व का सफलतापूर्वक निर्वहन कर रहा है।
गुरुकुल प्रभात आश्रम टिकरी के कुलाधिपति संत शिरोमणि श्रद्धेय स्वामी विवेकानंद सरस्वती के ब्रह्मत्व में जनचेतना महायज्ञ हुआ। एपेक्स विश्वविद्यालय जयपुर के कुलपति डॉक्टर सोमदेव साथांशु ने भी महायज्ञ का महत्व बताया। कार्यक्रम अध्यक्ष कुसुम शास्त्री, विक्रम शास्त्री ने स्वामी का यज्ञ के ब्रह्मा के रूप में तिलक लगाकर एवं माल्यार्पण किया।
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रुकुल के अध्यक्ष विवेक शेखर, वेद प्रकाश सराफ, प्रभात गुप्ता, पूर्व सांसद राजेंद्र अग्रवाल, विवेक गर्ग, अश्वनी गुप्ता, अजय गुप्ता, दयानंद शर्मा, अनुज शर्मा, डॉ. अल्पना शर्मा, प्रभात शेखर, वसु रस्तोगी ने भी आशीर्वाद प्राप्त किया। गुरुकुल के ब्रह्मचारियों ने सस्वर वेद मंत्रों का उच्चारण किया।