Homeशहर और राज्यउत्तर प्रदेशनोएडा में दो कंपनियों पर 10-10 लाख का जुर्माना

नोएडा में दो कंपनियों पर 10-10 लाख का जुर्माना

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– ​​​​​​​एनजीटी के नियमों का किया उल्लंघन, खुले में रखी थी कंस्ट्रक्शन सामग्री।

नोएडा। बढ़ते प्रदूषण के चलते नोएडा में ग्रेप की पहली स्टेज लागू है। निगरानी के लिए प्राधिकरण के साथ क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम लगातार काम कर रही है। ऐसे में ग्रेप-1 के नियमों का उल्ल्घंन करने पर दो निमार्णाधीन परियोजनाओं पर 10-10 लाख का जुमार्ना लगाया गया। इसमें पहली आईएसजीईसी हैवी लिमिटेड प्लाट नंबर-4 सेक्टर-142 नोएडा है। वहीं दूसरी एक्सप्रेस इंफ्रा वे प्लाट नंबर आईसी सेक्टर-142 है।

निरीक्षण में पाया गया कि दोनों ही कंपनियों में कंस्ट्रक्शन कार्य चल रहा था। निमार्णाधीन सामग्री रोड के किनारे खुले में रखी गई है। जिस पर ग्रीन नेट कवरिंग और समुचित जल का छिड़काव भी नहीं किया जा रहा है। दोनों ही स्थानों पर एनटीजी के नियमों का खुला उल्ल्घंन हो रहा था। ऐसे में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने भारी भरकम जुमार्ना लगाया गया। इस तरह का जुमार्ना आगे भी लगाया जाएगा।
दिल्ली एनसीआर एवं आस-पास के क्षेत्र एक्यूआई स्तर खराब श्रेणी में पहुंचने के बाद शहर में ग्रेप-1 लागू कर दिया गया है। प्रदूषण कम करने के लिए प्राधिकरण की 14 टीमों द्वारा सेक्टर और गांवों में निरीक्षण किया जा रहा है। जिसमें लोगों को ग्रेप की गाइड लाइन व एनजीटी के नियमों के अनुपालन के संबंध में जागरूक किया गया। नोएडा क्षेत्र में वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए सभी मुख्य सड़कों पर 20 टैंकर व 10 ट्रक माउंटेड एंटी स्मॉग गन के माध्यम से 120 किमी लंबाई में शोधित जल का छिड़काव किया गया।

14 मैकेनिकल स्वीपिंग मशीन लगाई

जिससे सड़कों पर उड़ने वाली धूल पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सके। जन स्वास्थ्य विभाग द्वारा निरंतर रूप से 14 मैकेनिकल स्वीपिंग मशीनों के माध्यम से 340 किमी मुख्य मार्गों पर वायु प्रदूषण नियंत्रण कराया गया। उद्यान विभाग द्वारा 05 टैंकरों के माध्यम सेंट्रल वर्ज पर लगे पेड-पौधे आदि की धुलाई का कार्य कराया गया।

निर्माण स्थलों पर एंटी स्मॉग गन

50 नग एंटी स्मॉग गन मशीनों का संचालन निमार्णाधीन साइटों पर किया जा रहा है। प्राधिकरण की 14 टीमों द्वारा रोजाना वायु प्रदूषण की रोकथाम के लिए विभिन्न निर्माण परियोजनाओं, मार्गों एवं खुले क्षेत्रों का निरीक्षण किया जा रहा है। जिन निर्माण स्थलों पर निर्माण सामग्री को ग्रीन नेट से ढककर, पानी का छिड़काव व निर्माण स्थलों के चारों ओर मेट्रो शीट, ग्रीन कारपेट से ढका गया।

 

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