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Thursday, January 29, 2026
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जनता परेशानियों से रही ‘टूट’, निगम में मची है जमकर ‘लूट’, पार्षदों और पूर्व पार्षद ने मंडलायुक्त से की शिकायत

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  • पार्षदों और पूर्व पार्षद ने मंडलायुक्त को टेंडर नियमों में धांधली सहित अन्य मुद्दों पर सौंपा ज्ञापन।

शारदा रिपोर्टर मेरठ। नगर निगम में इस समय भ्रष्टाचार चरम पर है। जिसके चलते आम जनता परेशानी झेल रही है। जलभराव, टूटी सड़कें, नाला सफाई, स्ट्रीट लाइट और कूड़ा निस्तारण सहित तमाम मुद्दे जनता की परेशानी का सबब बन रहे हैं। इन सबके बीच अब टेंडर नियमावली में संशोधन कर निगम को आर्थिक हानि पहुंचाने का मामला सामने आया है। जिसे लेकर पूर्व पार्षद ललित नागदेव के नेतृत्व में कई पार्षदों ने मंडलायुक्त से शिकायत की।

पूर्व पार्षद ललित नागदेव ने बताया कि निर्माण विभाग ( नगर निगम ) में गंभीर अनियमितता सामने आई है, जहां टेंडर 15 प्रतिशत बिलों पर लॉटरी सिस्टम के माध्यम से दिए जा रहे हैं। पूर्व नगर आयुक्त मनीष बंसल ने पार्षदों की शिकायत व बोर्ड चर्चा के बाद इस प्रक्रिया को बंद कर दिया था, जिसे अब फिर से नियम विरूद्ध शुरू किया गया है। जबकि न तो एनएचएआई और न ही पीडब्लूडी में ऐसा कोई प्रावधान है, जिन्हें नगर निगम अनुसरण करता है। निर्माण की गुणवत्ता सुनिश्चित करना निर्माण अधिकारियों की जिम्मेदारी है। सिर्फ यह कहना पर्याप्त नहीं कि बिलो टेंडर में काम खराब होगा। इससे निर्माण विभाग द्वारा स्थापित नियमों की अवहेलना कर नगर निगम को आर्थिक क्षति पहुंचायी जा रही है।

उन्होंने कहा कि निर्माण विभाग के मुख्य अभियन्ता गोरखपुर से स्थानान्तरित होकर मेरठ आए हैं। गोरखपुर में लॉटरीप्रणाली लागू नहीं थी, फिर मेरठ में इसे क्यों लागू किया जा रहा है, जिससे राजस्व की हानि हो रही है? इसकी जिम्मेदारी तय कर जांच की जाए ।

वहीं गृहकर का मुद्दा उठाते हुए कहा कि निगम के कर विभाग द्वारा अब भी मनमाने ढंग से नाम परिवर्तन शुल्क वसूला जा रहा है। जबकि उत्तर प्रदेश नगर विकास मंत्रालय द्वारा अधिकतम दस हजार रुपये का ही प्रावधान निर्धारित है, जिसे तत्काल प्रभाव से लागू किया जाना चाहिए । यही नहीं गृहकर निर्धारण में बहुत बड़ा खेल किया जा रहा है। जिसके संशोधन के नाम पर उपभोक्ता का मानसिक और आर्थिक शोषण हो रहा है।

इसके अलावा ज्ञापन में जलभराव की समस्या, नालों और नालियों की सफाई, पॉलीथिन प्रतिबंध, कूड़ा उठान आदि के मामले पर निगम के स्वास्थ्य विभाग पर सवाल उठाए गए हैं। जिसकी निष्पक्षता से जांच कराते हुए कार्रवर्इा की मांग की गई है। इस दौरान मनमोहन जौहरी, गुलवीर सिंह, सचिन त्यागी और रविंद्र सिंह आदि मौजूद रहे।

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