राजौरी में पाकिस्तानी गोलाबारी में मुजफ्फरनगर के चाचा-भतीजी की हुई थी मौत
मुजफ्फरनगर। जम्मू-कश्मीर के राजौरी में हुए पाकिस्तानी हवाई हमले में मुजफ्फरनगर के खाईखेड़ा गांव निवासी साहिब और उनकी 6 साल की भतीजी आयशा की मौत हो गई थी। हमला 9 मई की रात को हुआ, जब दोनों अपने किराए के मकान के आंगन में सो रहे थे। बमबारी इतनी खतरनाक थी कि साहिब का एक पैर पूरी तरह उधड़ गया। आयशा ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।
राजौरी में वाहन डेंटिंग-पेंटिंग का काम करने वाले साहिब और उनका भाई तोहिद पिछले 15 साल से वहीं परिवार के साथ रह रहे थे। घटना की सूचना 10 मई की सुबह घरवालों को मिली। गांव में जैसे ही यह खबर पहुंची, मातम पसर गया। 11 मई की सुबह जब दोनों के शव खाईखेड़ा गांव लाए गए, तो चीख-पुकार मच गई।
साहिब के भाई तोहिद ने बताया कि हमले से ठीक एक दिन पहले ही दोनों भाई घर में बैठे थे। माहौल खराब देख घर लौटने की बात हो रही थी, लेकिन साहिब ने कहा झ्र यहां तो आर्मी का र-400 डिफेंस सिस्टम लगा है, कुछ नहीं होगा…लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। उसी रात पाकिस्तानी बमबारी में साहिब और उनकी मासूम भतीजी की जान चली गई।
राजौरी में ही साहिब के साथ काम करने वाले अमेठी निवासी विनोद यादव ने बताया कि बम गिरते ही दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। साहिब का एक पैर उड़ चुका था। शवों को इकट्ठा करने के लिए खुद विनोद और तोहिद ने कोशिश की। विनोद ने बताया कि राजौरी से खाईखेड़ा तक शव लाने के लिए 25 हजार रुपये तक मांगे गए। “युद्ध के बीच भी कुछ लोग मुनाफा कमा रहे हैं।
जैसे ही शव गांव पहुंचे, पूरा गांव गमगीन माहौल में डूब गया। समाजवादी पार्टी के जिला अध्यक्ष जिया चौधरी, भीम आर्मी के रजत निठारिया और कई स्थानीय नेता मौके पर पहुंचे और कब्रिस्तान में शवों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया। जिया चौधरी ने आरोप लगाया कि प्रशासन की ओर से किसी अधिकारी ने अब तक पीड़ित परिवार से संपर्क नहीं किया।
उन्होंने कहा कि यह सरकार की संवेदनहीनता का बड़ा उदाहरण है। एसडीएम जानसठ जयेंद्र कुमार पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे। उन्होंने बताया कि राजौरी के डिप्टी कमिश्नर ने मृतकों की जानकारी मांगी है, ताकि जम्मू-कश्मीर सरकार की ओर से मुआवजा दिया जा सके।


