कई गांव पानी में डूबे, फसलें भी हुई खराब, स्कूल बंद किए गए
रामपुर। रामनगर बैराज, बहराइच से करीब 45 हजार क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद चांदपुर और पसियापुर गांवों में हालात बिगड़ गए हैं। मंगलवार-बुधवार की मध्यरात्रि पानी छोड़ा गया था। बुधवार सुबह तक दोनों गांवों के चारों तरफ पानी भर गया, जिससे उनका मुख्यालय से संपर्क टूट गया है।
गांवों की ओर आने-जाने वाले रास्ते पानी में डूब गए हैं, जिससे आवागमन मुश्किल हो गया है। चांदपुर और पसियापुर में चारों ओर पानी ही पानी नजर आया। रास्ते बंद होने से सामान्य आवागमन पूरी तरह बंद है।
करीब 20 गांवों के जंगल में खड़ी धान, उड़द, मक्का और गन्ने समेत अन्य फसलों पर भी पानी का असर पड़ने की संभावना है। बाढ़ के पानी को देखते हुए पसियापुर गांव का सरकारी स्कूल बंद कर दिया गया है।
ग्रामीण राशिद ने बताया कि जब तक गांव के चारों तरफ पानी रहेगा, तब तक प्राथमिक विद्यालय में पढ़ाई शुरू होना मुश्किल है। फिलहाल गांव में खाने-पीने की चीजों की कमी नहीं है, लेकिन अगर पानी लंबे समय तक जमा रहा तो रोजमर्रा की जरूरतों को लेकर परेशानी बढ़ सकती है।
जिन ग्रामीणों को जरूरी काम से शहर जाना पड़ रहा है, उनके लिए हालात चुनौतीपूर्ण हैं। तैरना जानने वाले लोग जान जोखिम में डालकर पानी पार कर रहे हैं। दूध बेचने वाले भी दूध की कैन लेकर पानी के बीच से बाहर निकल रहे हैं। एडीएम राजस्व आनंद कुमार ने कहा कि प्रशासन की नजर गांवों पर बनी हुई है और ग्रामीण जागरूक हैं।
इसी बीच चांदपुर गांव से एक दुखद घटना सामने आई है। करीब 10 दिन पहले 65 वर्षीय अफसर का निधन हुआ था। अब मंगलवार-बुधवार की मध्यरात्रि उनकी 60 वर्षीय पत्नी हसीना का भी बरेली के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया।
शव गांव लाया गया, लेकिन पानी भरा होने के कारण हसीना को चांदपुर के बजाय इमरता गांव के कब्रिस्तान में दफनाया जाएगा। चांदपुर के ज्यादातर लोग अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो पाएंगे। केवल वही ग्रामीण इमरता पहुंच सकेंगे, जो तैरकर पानी पार करने की स्थिति में होंगे। बाढ़ ने सिर्फ रास्ते ही नहीं रोके, बल्कि अपनों की अंतिम विदाई भी मुश्किल कर दी है।