प्रशासन के दावों की खुली पोल, पुलिस पर लापरवाही का आरोप
बुलंदशहर। पुलिस और जिला प्रशासन के कमजोर रवैये ने कानून-व्यवस्था के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। 20 अगस्त को जिन अपराधियों को कागजों में ‘जिला बदर’ घोषित कर अलीगढ़ सीमा पर छोड़ा गया था, वे चंद घंटों बाद ही बेखौफ होकर खुर्जा वापस लौट आए।
पुलिस की बड़ी लापरवाही के चलते तहसील चौकी से महज 150 मीटर की दूरी पर अधिवक्ता के बेटे और विधि छात्र अंकुर चौधरी पर बेरहमी से हमला किया गया। इलाज के दौरान 29 अगस्त को उसकी मौत हो गई।
सीसीटीवी फुटेज और पोस्टमार्टम रिपोर्ट इस वारदात की क्रूरता को दिखाती है। घटना वाली रात आरोपी निशांत, भूपेंद्र और उनके साथियों ने अंकुर पर लाठी, डंडों और ईंटों से करीब 100 बार हमला किया।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, अंकुर के सिर में 20 से 22 गंभीर फ्रैक्चर पाए गए, जिससे बहुत ज्यादा अंदरूनी खून बह गया और वह कोमा में चला गया। 29 अगस्त को उसकी मौत हो गई। इस खुलासे से जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया है।
खुर्जा देहात थाना पुलिस ने आरोपियों को सीमा पार छोड़ने के बाद उनकी निगरानी की कोई परवाह नहीं की। पुलिस की इसी लापरवाही का फायदा उठाकर अपराधी बेखौफ होकर शहर में घुसे और वारदात को अंजाम दे डाला।
जहां अन्य आरोपियों पर जल्दी कार्रवाई करते हुए 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया, वहीं प्रभावशाली लोगों के संरक्षण में पल रहे आरोपी प्रधान प्रशांत उर्फ पीसी पर अब तक कोई सख्त कार्रवाई नहीं हुई है। उस पर इनाम भी घोषित नहीं किया गया है।
मामले की गंभीरता और स्थानीय वकीलों के बढ़ते गुस्से को देखते हुए प्रशासन अब स्थिति संभालने में लगा है। शुरूआती जांच में लापरवाही मिलने पर चौकी प्रभारी को लाइन हाजिर किया गया है।
एसपी देहात अंतरिक्ष जैन ने बताया कि जिला बदर आरोपियों के वापस लौटने और वारदात करने की जांच की जा रही है। शुरूआती लापरवाही पर चौकी प्रभारी को लाइन हाजिर किया गया है। उन्होंने कहा कि दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई होगी और आरोपी प्रशांत पर भी जल्द इनाम घोषित किया जाएगा। पुलिस ने लाखन, चेतन, निशांत और भूपेंद्र को जेल भेज दिया है।