– जीआईएस सर्वे के आधार पर करीब 3.50 भवनों से गृहकर की वसूली करने का अभियान।
शारदा रिपोर्टर मेरठ। महानगर में जीआईएस सर्वे के आधार पर करीब 3.50 भवनों से गृहकर की वसूली करने का अभियान निगम का चल रहा हैं। 90 गृहकर मित्र की नियुक्ति कर भवन स्वामियों के घरों पर नया बिल वितरित करा दिया हैं। दस गुना से ज्यादा भी गृहकर बढ़ाकर बिल भवन स्वामियों के पास पहुंचे तो खलबली मच गई। आपत्ति बढ़ रही और समाधान नहीं हो पाया है।

हाउस टैक्स बिलों को लेकर काफी विरोध है, जिसका मुख्य कारण जीआईएस सर्वे के बाद अचानक बढ़े हुए और गलत बिल हैं, जिससे जनता में नाराजगी है और नगर निगम के खिलाफ रोज प्रदर्शन हो रहे हैं।
महापौर हरिकांत अहलूवालिया का कहना है कि यह टैक्स नहीं बढ़ा, बल्कि निर्माण बढ़ने से आया है और शिकायतों पर सुनवाई हो रही है, जबकि कांग्रेस और अन्य दल विरोध कर रहे हैं और बिलों के वितरण में बाधा आ रही है, जिससे वसूली प्रभावित है और निगम बैकफुट पर है।
उधर नगर निगम के वार्ड 63 के भाजपा पार्षद अनुज वशिष्ठ ने नगर आयुक्त को ज्ञापन सौंपकर हाऊस टैक्स के बिल जमा करने के लिए छूट की समय सीमा बढ़ाने की मांग की है। बता दें कि, सूचना प्रणाली सर्वेक्षण एक तकनीक है जो कंप्यूटर, सॉफ्टवेयर और डेटा का उपयोग करके पृथ्वी की सतह और उस पर मौजूद चीजों (जैसे सड़कें, इमारतें, पाइपलाइन) के स्थान-आधारित डेटा को इकट्ठा, प्रबंधित, विश्लेषण और मैप करती है, जिससे बेहतर योजना, निर्णय लेने और प्रबंधन में मदद मिलती है, खासकर शहरी विकास और टैक्स वसूली जैसे क्षेत्रों में इसकी मदद मिलती है।
नगर निगम ने इसी तकनीक से हाऊस टैक्स के बिल बनाकर भेजे हैं। जिसका विरोध हो रहा है। कई मामलों में बिना सर्वे या सही जानकारी के भी गलत टैक्स लगाए गए हैं। जनता की आपत्तियों पर निगम ठीक से सुनवाई और समाधान नहीं कर पा रहा है, जिससे असंतोष बढ़ रहा है। अस्थायी कर्मचारियों की कमी से भी दिक्कत हो रही है। बिलों और आपत्तियों के लिए नियुक्त कर्मचारियों को सही प्रशिक्षण नहीं मिला है, जिससे वे समस्या हल नहीं कर पा रहे। जनता की ओर से नगर निगम पर गलत और बढ़ा-चढ़ाकर टैक्स भेजने का आरोप लगा रही है।
भाजपा पार्षद अनुज वशिष्ठ का कहना है कि नगर निगम के हाऊस टैक्स के बिल को लेकर जिन लोगों ने आपत्ति दर्ज कराई है। उनका अब तक निस्तारण नहीं हो पाया है। जबकि छूट के साथ हाऊस टैक्स के बिल जमा करने की आखिरी तारीख करीब आ गयी है। जिसके कारण शहर की जनता में परेशानी उत्पन्न हो रही है। इसलिए जनहित में हाऊस टैक्स के बिल जमा करने की आखिरी तारीख आगे बढ़ाई जाये। ताकि सभी लोगों को छूट का लाभ मिल सके। उधर, महापौर हरिकांत अहलूवालिया कह रहे हैं कि टैक्स बढ़ा नहीं, बल्कि निर्माण कारण आया है और शिकायतों की जांच चल रही है।


