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Nauchandi Mela Meerut 2026 : अव्यवस्थाओं के बीच कल होगा मेला नौचंदी का उद्घाटन

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– मेले के उद्घाटन को लेकर तैयारियों में लापरवाही को लेकर जिला प्रशासन पर उठे सवाल।

शारदा रिपोर्टर मेरठ। मेरठ का नौचंदी मेला केवल एक साधारण मेला नहीं है, बल्कि यह उत्तर प्रदेश और पूरे भारत में हिंदू-मुस्लिम एकता, सांप्रदायिक सौहार्द और ‘गंगा-जमुनी तहजीब’ की एक जीती-जागती मिसाल है। सदियों से चली आ रही इस ऐतिहासिक परंपरा का आगाज इस वर्ष 15 मार्च को पूरी भव्यता और उत्साह के साथ होने का दावा किया जा रहा है।

 

 

जिला पंचायत प्रशासन ने इसके लिए अपनी कमर कस ली है और मेला मैदान को सजाने-संवारने का काम युद्ध स्तर पर किए जाने का दावा किया जा रहा है। प्रवेश द्वार से लेकर महापुरुषों की प्रतिमाओं तक के रंग-रोगन का काम जोरों पर है। हालांकि, जहां एक ओर भव्यता की तैयारी है, वहीं दूसरी ओर मेला मैदान में टूटे पड़े बिजली के खंभे और जमीन पर झूलते नंगे तार प्रशासनिक लापरवाही की कहानी भी बयां कर रहे हैं, जो किसी भी समय एक बड़े हादसे का कारण बन सकते है।

 

 

मेला परिसर में व्याप्त हैं अभी भी अव्यवस्था: मेले के उद्घाटन भले ही कल यानि रविवार को हो रहा हो, लेकिन धरातल पर स्थिति कुछ और ही है। मेला परिसर में चारो ओर गंदगी फैली हुई है। सार्वजनिक शौचालयों के दरवाजे टूटे हुए हैं और उनकी हालत बद से बदतर है। हालात ऐसे हैं कि इसबार भी मेला आयोजक सिर्फ उद्घाटन कराकर एक माह बाद ही मेला शुरू करने की मंशा बनाए बैठे हैं।

 

नौचंदी मैदान में टूटे हालत में पड़े शौचालय

– सार्वजनिक शौचालयों के दरवाजे टूटे हुए हैं और उनकी हालत बद से बदतर है।

– नौचंदी मैदान में टूटे हालत में पड़े शौचालय.

 

नौचंदी मैदान में मंदिर व दरगाह रोड पर फैली गंदगी

– मेला परिसर में चारो ओर गंदगी फैली हुई है।

– नौचंदी मैदान में मंदिर व दरगाह रोड पर फैली गंदगी.

नौचंदी मैदान में फैली गंदगी

– मेला परिसर में चारो ओर गंदगी फैली हुई है।

नौचंदी मैदान में फैली गंदगी

मेला परिसर में चारो ओर गंदगी फैली हुई है

नौचंदी मैदान में फैली गंदगी

 

बाले मियां की मजार और मां चंडी का पौराणिक मंदिर: इस मेले की सबसे बड़ी खासियत इसकी भौगोलिक और आध्यात्मिक संरचना है। नौचंदी मेला मैदान में एक सड़क के एक तरफ जहां हजरत बाले मियां की ऐतिहासिक मजार स्थित है, तो ठीक उसके सामने दूसरी तरफ मां चंडी देवी का पौराणिक और सिद्ध मंदिर स्थापित है।

बताया जाता है कि, जब मंदिर में शंख और घड़ियाल बजते हैं, तो उसी समय मजार से अजान की पवित्र आवाज गूंजती है। यह ध्वनि संगम यहां आने वाले हर इंसान को धर्म और जाति के बंधनों से ऊपर उठकर इंसानियत और प्रेम का संदेश देता है। यह परंपरा सैकड़ों सालों से चली आ रही है।

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