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लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने राज्यसभा में उठाया पश्चिमी उत्तर प्रदेश हाईकोर्ट बेंच का मुद्दा

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63 प्रतिशत मुकदमे पश्चिमी यूपी के, फिर भी बेंच नहीं: डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी

शारदा रिपोर्टर मेरठ। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच को लेकर एक तरफ जहां संघर्ष समिति ने 17 दिसंबर को मेरठ बंद का ऐलान किया है। वहीं इसी मुद्दे पर राज्यसभा सदस्य डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने राज्यसभा में सवाल उठाते हुए हाईकोर्ट बेंच की मांग को पूरी तरह वाजिब बताते हुए अतिशीघ्र इसे पूरा करने की मांग उठाई। उन्होंने समर्थन करते हुए कहा कि हाईकोर्ट इलाहाबाद में जितने भी मुकदमे चल रहे हैं, उनमें 63 प्रतिशत मुकदमे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हैं।

 

 

 

डा. वाजपेयी ने सदन में कहा कि हाईकोर्ट बेंच की मांग पचास वर्ष पुरानी है। आबादी, क्षेत्रफल और 10.33 लाख लंबित मुकदमों के आधार पर यह मांग न्याय संगत भी है। इसके साथ ही 1986 में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने भी लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में इसका समर्थन किया था।

डा. लक्ष्मीकांत ने कहा कि डा. संपूर्णानंद से लेकर मायवती तक के मुख्यमंत्री कार्यकाल में पांच मुख्यमंत्री इस मांग पर राज्य सरकार द्वारा प्रस्ताव भी पारित कर चुके हैं। इसके साथ ही 1986 में तत्कालीन विधि मंत्री हंसराज ने भी बेंच का समर्थन किया था।

 

 

वाजपेयी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 23 अप्रैल 2023 को प्रदेश के सभी जनपदों में ई-फाईलिंग सेंटर स्थापित करने की सहमति दी थी। उस पर काम भी हुआ, लेकिन अचानक छह माह बाद ही इस आदेश पर रोक लगा दी गई। क्या यह सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना नहीं है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट और भारत सरकार के आदेश के निर्णय के विरुद्ध एक ओर अवैधानिक आदेश जारी किया गया, जिसमें कहा गया कि ई-फाईलिंग सेंटर से वाद केवल प्रयागराज बार में पंजीकृत अधिवक्ता रही कर सकते हैं।

राज्यसभा सदस्य डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने अपनी मांग के समर्थन में कहा कि जब मुंबई हाईकोर्ट की पांचवीं बेंच कोल्हापुर में दी जा सकती है, तो उत्तर प्रदेश में क्या दिक्कत है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के क्षेत्रफल, जनसंख्या और लंबित मुकदमों को देखते हुए मेरठ, आगरा, गोरखपुर और काशी में चार बेंच मिलनी चाहिए। इसके साथ ही प्रयागराज और लखनऊ हाईकोर्ट के क्षेत्रों का पुनर्निधारण होना चाहिए।

 

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