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Friday, January 9, 2026
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Homeउत्तर प्रदेशMeerutहस्तिनापुर क्षेत्र में दलितों की जमीन पर किया भूमाफियाओं ने कब्जा !

हस्तिनापुर क्षेत्र में दलितों की जमीन पर किया भूमाफियाओं ने कब्जा !

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  • जलालपुर जोरा के ग्रामीणों ने कलक्ट्रेट पहुंचकर किया हंगामा,
  • ज्ञापन सौंपते हुए पुलिस और तहसील प्रशासन पर लगाया आरोप।

शारदा रिपोर्टर मेरठ। ग्राम जलालपुर जोरा के बड़ी संख्या में कलक्ट्रेट पहुंचे अनुसूचित जाति के लोगों ने अपनी जमीनों पर भूमाफियाओं द्वारा कब्जा किए जाने का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। ग्रामीणों ने हस्तिनापुर पुलिस और तहसील मवाना प्रशासन पर भूमाफियाओं से सांठगांठ का आरोप लगाया।

ग्रामीणों नेबताया कि ग्राम जलालपुर जोरा में रेडियों वालो की भूमि पर ओबीसी समाज के भूमाफियाओं ने हमारी खेती की भूमि पर कब्जा करते चले आ रहे है। प्रत्येक वर्ष किसी न किसी अनुसूचित जाति के लोगों की भूमि पर कब्जा कर लेते है। ग्राम जलालपुर जोश में ४० से ७० परिवार अनुसूचित जाति के थे। हमारी झोपडी घर जो रेडियो पर थे, उसमें सुरेश पुत्र छज्जू, जो अब मृतक हो गया है, अरविंद पुत्र सुरेश ने लगभग 9 वर्ष पूर्व उनमें आग लगा दी गई थी।

जिसकी हमने थाना हस्तिनापुर में शिकायत की थी लेकिन कार्यवाही कुछ नही हुई थी। वहीं किशोरपुर में भी भूमाफियाओं ने अनुसूचित जाति के लोगों को आर्थिक व मानसिक शोषण कर रखा है।

इन सभी लोगों पर एससी/एसटी एक्ट व भूमाफिया एक्ट के तहत कानूनी कार्यवाही की जाए। इन भूमाफियाओं ने अनुसूचित जाति के लोगों का आर्थिक, शारीरिक व मानसिक शोषण के तहत कानूनी कार्यवाही की जाए और जब से इन लोगों ने हमारी भूमि पर कब्जा किया हुआ है इनसे हमारी भूमि का ठेका का मूल्य दिलवाया जाए। जिससे कि हमारे द्वारा बैंकों से लिया गया ऋण अदा कर सकें। हमारी आर्थिक स्थिति बहुत ही खराब है और हमें हमारी भूमि पर कब्जा मुक्त कराकर हर्म दिलाई जाए। इन्हीं के साथ के लोगों ने पांच हमार बीघा से अधिक ग्राम समाज, वन विभान व गंगा नदी की भूमि पर कब्जा किया हुआ है। यें बड़े स्तर पर भूमाफिया हं। इस भूमि को कब्जामुक्त कराकर इनमें वृक्ष लगाए गए। जिससे कि हमारा पर्यावरण सुरक्षित हो सके है। अनुसूचित जाति के 70 फीसदी लोगों की भूमि पर वहां के लोगों ने कब्जा किया हुआ है। कुछ माह पूर्व हमारी गेहूं की फसल में आग लगा दी गई। लेकिन इन लोगों पर अभी तक कोई कार्यवाही नहीं की गई। इन लोगों द्वारा अनुसूचित लोगों की न जाने कितनी बार पिटाई कर चुके हैं। तहसील मवाना को इन लोगों से प्रत्येक वर्ष इस भूमि से दो हजार रुपए बीघा के हिसाब से करोड़ों रुपए मिलते हैं। जिसमें सभी कर्मचारी बंदरबांट करते हैं। ग्रामीणों ने जिन लोगों की जमीन पर कब्जा किया हुआ है, उनकी सूची भी जिलाधिकारी को सौंपी है।

इनकी कब्जाई गई जमीन: इन्दर सिंह पुत्र अमर सिंह, भोपाल पुत्र भगवाना, विजयपाल पुत्र अमर सिंह, विजेंद्र पुत्र अगर सिंह, ऊषा पत्नी शशिकान्त, सलोनी पुत्री शशिकान्त, शिवम पुत्र शशिकान्त, नरेंद्र पुत्र जयपाल सिंह, माया पत्नी जयपाल सिंह, नीरज पुत्र जयपाल सिंह, शिवकुमार पुत्र जयपाल सिंह, चमन सिंह पुत्र बुले, सुन्दर पाल पुत्र बुले, बबलू पुत्र बुले, मुकत्यारी पत्नी बुले, सुन्दरी पुत्री बुले, अजब सिंह पुत्र शेर सिंह, ओमवती पत्नी शेर सिंह, अजयपाल पुत्र शेर सिंह, रकम सिंह पुत्र मनफूल, राजकुमार पुत्र मनफूल, अनिल पुत्र मनफूल, मंगते पुत्र अतरे, हरनाम पुत्र बेघराम, जिल सिंह पुत्र बेघराम, सुरेश चमनपाल पुत्र सुरजा, श्यामपाल पुत्र चुहिया, महेशपाल, राजबीर पुत्र खीमचंद, तिलकराम पुत्र खच्डू, बाबू पुत्र टिकाराम, मनोज पुत्र टिकाराम, भरत पुत्र शीशपाल, विमलेश, सूरज, मदन, जिराज, अनील, सुरेश, सुरेद्र, मीना, अंकित, महावीर, संतरपाल, कमल, छतरपाल, विजयपाल, विजयभान, जगसेन आदि हैं।

वहीं सुनील पुत्र जयपाल सिंह (जिसको 2006 में सैनियों ने गंगा नदी में डुबोकर मार दिया था, थाना हस्तिनापुर में दोषियों के खिलाफ कोई कार्यवाही नही हुई थी।) इनके अलावा कुछ नाम लेखपाल द्वारा पैमाईश के समय नाम सामने आएंगे।

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