– विभिन्न मांगों को लेकर बुनकर समाज के लोगों ने कलक्ट्रेट पर किया प्रदर्शन।
शारदा रिपोर्टर मेरठ। उत्तर प्रदेश परिक्षेत्र में बुनकरों पर हो रहे अत्याचार के विरोध में बुनकर समाज के दर्जनों सदस्यों ने सोमवार को कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री के नाम संबोधित एक ज्ञापन डीएम कार्यालय में सौँपा। ज्ञापन के माध्यम से बताया कि सरकार के कार्यकाल से ही निरन्तर बुनकरों के हितों में कार्य किये जा रहे है और निरन्तर नई योजनाओं का विस्तार किया जा रहा है, जिससे बुनकरों का आर्थिक विकास एवं सामाजिक विकास हो सके। किन्तु वस्त्र मंत्रालय भारत सरकार के कुछ भष्ट्र अधिकारी उन योजनाओं को दमन करने एवं बुनकरों का शोषण करने में लगे हुए है।
भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय द्वारा द्वारा उत्तर प्रदेश को दो भागों में बाँटा गया है। पश्चिमी उप्र के लगभग 34 जनपदों को बुनकर सेवा केन्द्र मेरठ एवं शेष जनपदों को बुनकर सेवा केन्द्र बनारस में बाँटा गया है। उन्होंने कहा कि, पश्चिमी उ०प्र० के मेरठ बुनकर सेवा केन्द्र के 34 जनपदों में लगभग 1 लाख से अधिक पंजीकृत बुनकर है। ये पंजीकृत बुनकर मेरठ बुनकर सेवा केन्द्र के माध्यम से लगने वाले मेलों के माध्यम से ही अपने द्वारा बनाये गये माल की बिक्री करके अपना जीवन यापन करते है।
परन्तु उत्तरी क्षेत्र के निदेशक विशेष नोटियाल द्वारा मेरठ परिक्षेत्र के बुनकरों का मेला/दिल्ली हॉट में कोटा बिना किसी उचित कारण कम कर रहे है। तथा वाराणसी क्षेत्र के बुनकरों का कोटा दुगुना कर दिया गया है। इससे मेरठ परिक्षेत्र के बुनकरों के परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट उत्पन्न हो गया है।
आरोप लगाते हुए कहा कि इस सबंध मे बात करने पर किसी भी अधिकारी द्वारा कोई सन्तोषजनक उत्तर नही दिया जाता है। यदि किसी मेले में मेरठ परिक्षेत्र के बुनकरों को स्टॉल मिल भी जाता है तो निदेशक उसे किसी ना किसी कारण से बन्द करवा देते हैं। जिससे बुनकरों और समितियों को बहुत आर्थिक हानि वहन करनी पडती है।
इसलिए बुनकर समाज यह अनुरोध करता है कि, मेरठ क्षेत्र के बुनकरों के भविष्य को ध्यान मे रखते हुए मेरठ परिक्षेत्र के बुनकरों का कोटा वापस दिलाने की कृपा करें। जिससे मेरठ परिक्षेत्र के बुनकरों अपना व अपने परिवार का जीवन यापन कर सकें तथा ऐसे भष्ट्र अधिकारी की जाँच करके इसके विरूद्ध उचित कार्यवाही करने की कृपा करें, जिससे अन्य अधिकारी भी इस प्रकार गरीब जनता का शोषण करने का प्रयास न कर सकें।


