– समाजसेवी, स्वयंसेवी संगठनों के साथ ही राजनीतिक दलों ने भी दी पुष्पांजली, आंबेडकर प्रतिमा पर किया माल्यार्पण।
शारदा रिपोर्टर मेरठ। शनिवार को जिलेभर में संविधान रचयिता बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर का परिनिर्वाण दिवस धूमधाम से मनाया गया। इस मौके पर सपा, कांग्रेस समेत विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने उनकी प्रतिमा पर फूल मालाएं अर्पित की और उन्हें नमन किया।

कचहरी चौराहे पर स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर सपा जिलाध्यक्ष कर्मवीर सिंह गुमी और पूर्व विधायक योगेश वर्मा के साथ पार्टी पदाधिकारियों ने फूल-मालाएं अर्पित कर श्रद्धांजलि अर्पित की। दूसरी ओर, कांग्रेस जिलाध्यक्ष गौरव भाटी एवं कांग्रेस महानगर अध्यक्ष रंजन शर्मा ने भी अलग-अलग ग्रुप में यहां पहुंचकर पार्टी सदस्यों के साथ डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर फूल-मालाएं अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।

इस दौरान पूर्व विधायक योगेश वर्मा ने बताया कि, हर साल 6 दिसंबर का दिन भारत रत्न डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर की पुण्यतिथि को महापरिनिर्वाण दिवस के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि, महापरिनिर्वाण दिवस संविधान के रचयिता और दलितों के मसीहा बाबासाहेब डॉ. बीआर अंबेडकर की 70वीं पुण्यतिथि है। 1956 में इसी दिन उनकी मृत्यु हुई थी। डॉ. बीआर अंबेडकर की पुण्यतिथि को देश भर में महापरिनिर्वाण दिवस के तौर पर मनाया जाता है।
डॉ. अंबेडकर ने वर्ष 1956 में हिंदू धर्म छोड़कर बौद्ध धर्म अपनाया था, वह हिंदू धर्म के कई तौर तरीकों से काफी दुखी हो गए थे। परिनिर्वाण बौद्ध धर्म के प्रमुख सिद्धांतों और लक्ष्यों में से एक है। इसका मतलब ‘मौत के बाद निर्वाण’ होता है। बौद्ध धर्म के मुताबिक जो व्यक्ति निर्वाण प्राप्त करता है वह संसारिक इच्छाओं, मोह माया से मुक्त हो जाता है।
निर्वाण की अवस्था हासिल करना बेहद कठिन होता है। इसके लिए किसी को बहुत ही सदाचारी और धर्म सम्मत जीवन जीना होता है। 80 साल की आयु में भगवान बुद्ध के निधन को असल महापरिनिर्वाण कहा गया है। यह बौद्ध कैलेंडर के अनुसार सबसे पवित्र दिन होता है। इसलिए ही महापरिनिर्वाण दिवस डॉ. बीआर अंबेडकर की परिवर्तनकारी विरासत के लिए श्रद्धांजलि के रूप में बहुत मायने रखता है।

इनके अलावा समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष कर्मवीर सिंह गुमी ने भी बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं के साथ कचहरी स्थित डा. आंबेडकर प्रतिमा स्थल पर जाकर माल्यार्पण किया। उन्होंने कहा कि डा. आंबेडकर के कारण ही आज देश की संवेधानिक स्थिति मजबूत है। लेकिन वर्तमान में सत्तारूढ़ दल संविधान को ही बदलने पर उतारू है। जिससे देश के सामाजिक ढांचे को तोड़ने का प्रयास किया जा
रहा है।



