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Saturday, January 10, 2026
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Homeदेशसुप्रीम कोर्ट में बहस, यह कुत्तों बनाम इंसानों का मामला नहीं

सुप्रीम कोर्ट में बहस, यह कुत्तों बनाम इंसानों का मामला नहीं

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों के मामले में शुक्रवार को लगातार तीसरे दिन सुनवाई हो रही है। एनीमल राइट्स की तरफ से पेश वकील शादान फरासत ने कहा- यह कुत्तों बनाम इंसानों का मामला नहीं है। यह ऐसा मामला है जहां राज्य अपनी जिम्मेदारी निभाने में फेल हो गया है। वे अब एक-दूसरे को बलि का बकरा बना रहे हैं। जबकि इंसानों और जानवरों दोनों की सुरक्षा होनी चाहिए।

 

Supreme Court

 

इस मामले पर पिछले 7 महीनों में छह बार सुनवाई हो चुकी है। पिछले साल नवंबर में सुप्रीम कोर्ट ने स्कूलों, अस्पतालों, बस स्टैंड, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और रेलवे स्टेशनों से आवारा कुत्तों को हटाने का आदेश दिया था। इसके साथ ही कोर्ट ने कहा था कि इन जानवरों को तय शेल्टर में ट्रांसफर किया जाए। कुत्तों के माइक्रो-चिप लगवाने की सलाह भी ठीक है। इसकी कीमत 100-200 रुपये है। एक बार जब यह लग जाएगी तो अगर कोई आक्रामक कुत्ता लोगों के पीछे भागता है। तो उसे ट्रैक कर आॅरेंज कैटेगरी में डाला जा सकता है। अगर काटने की घटना होती है तो रेड फ्लैग लगाया जा सकता है। दूसरे देशों में यह कारगर है। वहां इंसान और कुत्ते साथ रहते हैं।

जस्टिस मेहता: उन देशों की आबादी कितनी है? जरा प्रैक्टिकल बातें करें।

सीनियर एडवोकेट महालक्ष्मी पावनी (एनीमल राइट्स एक्टिविस्ट): मैं कुत्तों को खाना खिलाने वाली महिलाओं की खराब हालत को सामने लाना चाहती हूं। कुछ लोग महिलाओं को परेशान कर रहे हैं, पीट रहे हैं और उन पर हमला कर रहे हैं।

जस्टिस नाथ: एफआईआर दर्ज कराओ, आपको कौन रोक रहा है? यह एक आपराधिक अपराध है।

पावनी: अधिकारी चुप हैं, यह तो एक तरह से समर्थन करना हुआ। 50 लोग घर में घुस आए, कपड़े उतारे, महिला पर हमला किया। उसके पति को भी पीटा।

जस्टिस नाथ: हम अलग-अलग मामलों का ध्यान नहीं रख सकते। यह कानून और व्यवस्था की समस्या है।

पावनी: कोई एफआईआर दर्ज नहीं की जा रही है।

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