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Saturday, January 10, 2026
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पाठ्यक्रम लेखकों की कार्यशाला का हुआ आयोजन

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शारदा न्यूज़, संवाददाता |

मेरठ। विश्वविद्यालय के मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा निदेशालय द्वारा पाठ्यसामग्री निर्माण हेतु पाठ्यक्रम सामग्री लेखकों की एक कार्यशाला का आयोजन किया गया।

कार्यशाला के आरंभ में मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा निदेशालय के निदेशक प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी ने कार्यशाला की रूपरेखा प्रस्तुत की। प्रो॰ लोहनी ने बताया कि चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ दूरस्थ शिक्षा प्रारम्भ करने जा रहा है, जिसके लिए विश्वविद्यालय परिसर में मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा निदेशालय स्थापित किया गया है।

कार्यशाला में विषय विशेषज्ञ के रूप में इग्नू नई दिल्ली से पधारे महत्वपूर्ण विशेषज्ञ प्रो॰ जयदीप शर्मा एवं प्रो. जितेन्द्र श्रीवास्तव जी ने दूरस्थ शिक्षा निदेशालय की कार्यप्रणाली एवं सामग्री लेखन पर विस्तार से चर्चा की।

प्रो., जयदीप शर्मा ने कहा कि दूरस्थ शिक्षा प्रणाली का कार्य एक बहुविध प्रकार का कार्य है जिसकी उपादेयता कोविड महामारी के दौरान समझ में आई। क्लास रूम शिक्षा एवं दूरस्थ शिक्षा में महत्वपूर्ण अन्तर यह है कि क्लास रूम शिक्षा में समस्या का समाधान तत्क्षण हो जाता है, जबकि दूरस्थ शिक्षा में ऐसा संभव नहीं है। दूरस्थ शिक्षा में शिक्षक और विद्यार्थी का संबंध वायवीय ढंग से होता है, इसलिए सामग्री लेखन में ये जरूरी होता है कि नैतिकता, शिक्षण प्रविधि एवं शिक्षण अधिगम पर बल दिया जाए साथ ही बौद्धिक सम्पदा अधिकार, पेड साहित्य और मुक्त साहित्य के लिए लाईसंेस की अनिवार्यता महत्वपूर्ण है। सामग्री लेखन के क्रम में बहुत सारे शब्दावलियों के समुच्चय और भाषा की दुरूहता का निवारण भी अनिवार्य हो जाता है। इग्नू इस प्रकार के विभिन्न पाठ्यक्रमों को संचालित करता है जो विभिन्न विषयों के विभिन्न पाठ्यक्रमों से जुडे़ हुए हैं।

जब हम दूरस्थ शिक्षा के लिए सामग्री तैयार करते हैं, तब हमारा दृष्टिकोण वैश्विक होना चाहिए। यह भी होना चाहिए कि पाठ्यक्रम निर्माण के क्रम में विषय विशेषज्ञ के रूप में वैश्विक विद्वानों को भी जोड़ा जाए। इसके लिए पाठ्यक्रम का मूल्यांकन जरूरी हो जाता है। इससे नौसिखिया एवं वयस्क विद्यार्थी को लाभ मिलेगा क्योंकि दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से दोनों ही प्रकार के लोग अध्ययन करते हैं। दूरस्थ शिक्षा में पाठ्यक्रम को प्रकाशित करना, प्रिंट करना, यह अत्याधिक व्यय की मांग करता है। यहाँ पर मानदेय भले ही कम हो, लेकिन पाठ्यक्रम की गुणवत्ता में कोई कमी नहीं आनी चाहिए।

सामग्री लेखन के लिए प्रजेंटेशन अनिवार्य है, जो समय-समय पर दूरस्थ शिक्षा निदेशालय एवं कार्यक्रम संयोजक के द्वारा किया जाना चाहिए। यूजीसी के नियमन के अनुसार प्रोग्राम का क्रेडिट निर्धारित किया जाना चाहिए। यह पाठ्यक्रम समिति के सदस्यों को तय करना होता है कि किससे सामग्री लिखवाई जाए। इसके लिए ईकाईयों का निर्धारण और सामग्री का यथोचित विवरण प्रस्तुत किया जाना चाहिए। सामग्री लेखन में यह अनिवार्य हो जाता है कि लिखने वाला सबसे तेजस्वी विद्यार्थी को भी ध्यान में रखकर लिखा जाए और सबसे कमजोर विद्यार्थी को भी ध्यान में रखकर लिखा जाए। जैसे आप कक्षा में खड़े होते हैं विद्यार्थियों को सहज करने का प्रयास करते हैं, उसी प्रकार सामग्री लेखन में भी पाठक को सामग्री के स्तर पर सहज करने का प्रयत्न करना चाहिए। सामग्री संकलन के लिए टीम वर्क जरूरी है। जिसमें पाठ्यक्रम संयोजक और कार्यक्रम संयोजक दोनों की भूमिका अति महत्वपूर्ण हो जाती है। दूरस्थ शिक्ष में ऑडियो और वीडियो मोड दोनों की आवश्यकता होती है। सबकुछ यहाँ पर रिकॉडेड है, डॉक्यूमेंटेड है इसलिए गुणवत्ता को लेकर के किसी भी प्रकार से समझौता नहीं किया जा सकता है। सामग्री लेखन में अनुवाद की भी प्रमुख भूमिका है, क्योंकि बहुत सारे ऐसे विद्यार्थी जुड़े होते हैं, जिनकी जानकारी में हम से कम नहीं होती है।

प्रो. जितेन्द्र श्रीवास्तव ने कहा कि सामग्री लेखन के समय इस पर ध्यान देना जरूरी है कि सामग्री की समस्या किस प्रकार की हो सकती है और विद्यार्थी कहाँ-कहाँ उलझ सकता है, इसलिए पाठ लेखन में सबसे पहले उद्देश्य और प्रस्तावना पर काम होना चाहिए। तेजस्वी विद्यार्थी और मंद विद्यार्थी दोनों को ध्यान में रखकर यदि सामग्री लिखी जाए तो वह पाठ उन्नत हो जाता है। दूरस्थ शिक्षा की संरचना चुनौती पूर्ण है इसलिए पाठ लिखते समय जाति, धर्म, क्षेत्र इत्यादि से संबंधित विषयों पर संयमित भाषा का प्रयोग करना चाहिए ताकि किसी भी प्रकार की मानहानि न हो। सामग्री लेखन की रूपरेखा में उद्देश्य, प्रस्तावना पाठ लेखन, सारांश तथा प्रश्नोत्तरी का अलग-अलग हिस्सा होना चाहिए। की नोट्स और कर वर्ड को सामग्री के अंत में लिखा जाना चाहिए।

कार्यशाला के अंत में पूर्व प्रतिकुलपति प्रो. जे.के. पुण्डीर ने कहा कि इस विश्वविद्यालय से मैं 48 वर्ष पूर्व जुड़ा था। इस पाठ्यक्रम के आरंभ होने से ऐसा महसूस होता है कि चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ अपने वास्तविक उद्देश्यों को प्राप्त कर सकेंगा।
सहायक निदेशक केके शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापन किया। कार्यशाला का संचालन उपनिदेशक डॉ. राकेश कुमार शर्मा ने किया।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, शिक्षक तथा ऑनलाईन जुड़े विभिन्न महाविद्यालयों के शिक्षक उपस्थित रहे। जिनमें प्रो.अतवीर सिंह, प्रो. आलोक कुमार, प्रो. शिवराज सिंह, प्रो. जमाल अहमद सिद्दीकी, प्रो. जयमाला, प्रो. जगवीर भारद्वाज, प्रो. विजय जायसवाल, डॉ. वाचस्पति मिश्रा, डॉ. विद्यासागर सिंह, डॉ. प्रवीण कटारिया, यज्ञेश कुमार, डॉ. नरेन्द्र कुमार, डॉ. आसिफ अली, ओमपाल शास्त्री, डॉ.महिपाल आदि उपस्थित रहे।

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