Homeउत्तर प्रदेशMeerutमेरठ: निगम को नहीं मिल रही कैटिल कॉलोनी बसाने के लिए जमीन

मेरठ: निगम को नहीं मिल रही कैटिल कॉलोनी बसाने के लिए जमीन

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– शहर के भीतर संचालित डेयरियों से निकलने वाले गोबर से नाले, नालियां हो रही चोक।

शारदा रिपोर्टर मेरठ। शहर के गली मोहल्लों में अवैध डेयरियां शहर की एक गंभीर समस्या हैं। इन डेयरियों से निकलने वाला गोबर शहर की जलनिकासी और सफाई व्यवस्था पर भारी पड़ता है। इन अवैध डेयरियों पर लगाम के लिए शासन ने 27 साल पहले ही डेयरियों को घनी आबादी से दूर स्थानांतरित करने के आदेश दिए थे, लेकिन 27 साल भी शहर में संचालित हो रही अवैध डेयरियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

 

 

हालांकि, हर साल जिला प्रशासन, नगर निगम और प्राधिकरण इन डेयरियों को शहर से बाहर ले जाने का प्रयास तो करता है। लेकिन,प्रयास का फल नही मिल पा रहा है। इतना ही नही हाईकोर्ट का भी सख्त आदेश है, बावजूद इसके इन आदेशों का भी पालन कोई नहीं हो पा रहा है।

गौरतलब है कि डेयरियों को शहर के बाहर स्थानांतरण करने का 1998 में शासन ने आदेश दिया था। इसके बाद डेयरियों को शहर से बाहर स्थानांतरित करने के लिए सात साल पहले नगर निगम की चारागाह की काशी अच्छरोंडा गांव में स्थित 85,430 वर्ग मीटर जमीन में कैटल कालोनी बसाने की योजना बनाई गई थी। इसके साथ ही जिला प्रशासन ने इसके भूउपयोग को बदलवाने की घोषणा की भी थी।

लेकिन इसी बीच निगम अफसरों ने इस भूमि पर उपवन योजना के तहत सघन वन विकसित करने का प्रस्ताव दे दिया। जिसे स्वीकृत करके सरकार ने 474 लाख रुपया भी जारी कर दिया। इस कारण से डेयरियों के स्थानांतरण की प्रक्रिया अधर में ही रूक गई, जो अब तक परवान नही चढ़ सकी है। वहीं, लगातार शहर से बाहर जाने के नगर निगम के दबाव के दौरान लंबे समय तक कैटिल कालोनी की व्यवस्था न होने पर मेरठ शहर के 2250 डेयरी संचालकों ने डेयरी संचालक संघ का गठन करके हाईकोर्ट में अपील की थी। उन्होंने कहा कि हम शहर के बाहर जाने के लिए तैयार हैं हमें कैटिल कालोनी बसाकर दी जाए।

इस मांग पर कोर्ट ने चार जनवरी 2019 को जिला

प्रशासन, नगर निगम और प्राधिकरण को दो महीने के भीतर कैटिल कालोनी का प्रस्ताव तैयार करके शासन को भेजने और उसे स्वीकृत कराने का आदेश भी दिया था। लेकिन आज तक यह प्रक्रिया अधूरी है। इसके बाद कैटिल कालोनी बसाने के लिए नंगला पातू और खरखौदा की जमीन का प्रस्ताव रखा गया था। लेकिन सर्वे में दोनों ही स्थान कैटिल कालोनी के लिए सही नहीं मिले।

काशी अच्छरौंडा क्षेत्र नगर निगम सीमा में है, इसलिए यहां कैटिल कालोनी बसाने को जमीन नही दी जा सकती है। शहर के बाहरी क्षेत्रों में कैटिल कालोनी के लिए जगह तलाश की जा रही है।- सौरभ गंगवार, नगर आयुक्त

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