कोलकाता: पश्चिम बंगाल में अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ कार्रवाई तेज होती दिखाई दे रही है। राज्य में ‘डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट’ पॉलिसी के तहत कैंपेन चलाए जाने के बाद बड़ी संख्या में लोग बांग्लादेश सीमा की ओर पहुंचने लगे हैं। उत्तर 24 परगना जिले में स्थित हाकिमपुर चेकपोस्ट, जो भारत-बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा पर है, वहां मंगलवार को बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ देखी गई। बताया जा रहा है कि ये वे लोग हैं जिन पर अवैध रूप से भारत में रहने का आरोप है।
सूत्रों के मुताबिक, सीमा पर पहुंचे कई लोगों का कहना है कि अब उन्हें काम नहीं मिल रहा और प्रशासन भी उन्हें रहने की अनुमति नहीं दे रहा। इसी वजह से वे वापस बांग्लादेश लौटने की तैयारी कर रहे हैं। हावड़ा में मोटरसाइकिल मैकेनिक का काम करने वाले एक बांग्लादेशी नागरिक ने बताया, ‘यहां अभी बहुत परेशानी चल रही है, इसलिए हम जा रहे हैं। काम नहीं मिल रहा और कोई रहने नहीं दे रहा। हम 2-3 साल पहले बांग्लादेश से आए थे। हमें एक व्यक्ति यहां लेकर आया था। मेरे पास आधार कार्ड या राशन कार्ड नहीं है। हम 10 लोग आए थे, लेकिन अब सिर्फ मैं लौट रहा हूं।’\
बीजेपी सांसद खगेन मुर्मू ने दावा किया कि कई अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों को पहले ही वापस भेजा जा चुका है, जबकि बाकी की तलाश जारी है। उन्होंने कहा, ‘अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों की जगह सिर्फ होल्डिंग सेंटर में है। भाजपा ने अपने घोषणा पत्र में भी कहा था कि घुसपैठियों के लिए भारत में कोई जगह नहीं है। कुछ लोग भाग गए हैं, कुछ को वापस भेज दिया गया है और कुछ अभी छिपे हुए हैं। हम सबको ढूंढ निकालेंगे।’ उन्होंने यह भी कहा कि भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने का काम जारी है और पार्टी केंद्र सरकार के कामकाज में दखल नहीं देगी।
बंगाल सरकार ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों और सजा पूरी कर चुके विदेशी कैदियों के लिए होल्डिंग सेंटर बनाए जाएं। गृह एवं पर्वतीय मामलों के विभाग की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार ऐसे लोगों को अस्थायी रूप से रखने की व्यवस्था की जाए, जिनकी पहचान अवैध विदेशी नागरिक के रूप में हुई है। 23 मई को जारी निर्देश में कहा गया कि बांग्लादेशी नागरिकों और रोहिंग्या समुदाय के उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए जो भारत में अवैध रूप से रह रहे हैं और जिनकी वापसी या निर्वासन की प्रक्रिया लंबित है।