बॉर्डर पर रोका गया सपा प्रतिनिधिमंडल
प्रतापगढ़। एक कंप्यूटर आॅपरेटर की मौत का मामला अब सिर्फ जांच तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसे लेकर सियासी पारा भी चढ़ गया है। सिधौली गांव निवासी आपूर्ति विभाग के कंप्यूटर आॅपरेटर सौरभ विश्वकर्मा की मौत के बाद समाजवादी पार्टी ने प्रशासन पर सवाल उठाते हुए पीड़ित परिवार से मुलाकात का फैसला किया। हालांकि, परिवार से मिलने जा रहे सपा नेताओं को जिले की सीमा पर ही पुलिस ने रोक दिया, जिसके बाद मौके पर जमकर बहस हुई।
सपा का प्रतिनिधिमंडल 17 अगस्त को पीड़ित परिवार से मिलने प्रतापगढ़ पहुंच रहा था। रामफल इनारी के पास जिले की सीमा पर पुलिस ने बैरिकेडिंग कर नेताओं को आगे जाने से रोक दिया। पुलिस की कार्रवाई के बाद सपा नेताओं और पुलिस अधिकारियों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। प्रतिनिधिमंडल में शामिल नेता लगातार पुलिस से आगे जाने की अनुमति मांगते रहे, लेकिन उन्हें सीमा से आगे नहीं बढ़ने दिया गया।
प्रतिनिधिमंडल में सांसद पुष्पेंद्र सरोज, विधायक आरके वर्मा, पूर्व विधायक राजकुमार पाल और पूर्व विधायक नागेंद्र सिंह उर्फ मुन्ना यादव समेत कई सपा नेता मौजूद थे। नेताओं का कहना था कि वे किसी राजनीतिक कार्यक्रम के लिए नहीं, बल्कि मृतक के परिवार से मुलाकात कर उनका हाल जानने और उन्हें न्याय दिलाने की मांग को लेकर पहुंचे हैं। वहीं, पुलिस प्रशासन ने कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए नेताओं को आगे जाने से रोक दिया। इस दौरान मौके पर काफी देर तक गहमागहमी का माहौल बना रहा। सपा नेता पुलिस की बैरिकेडिंग के सामने खड़े होकर परिवार से मिलने की मांग पर अड़े रहे।
मामले की सियासी गर्मी प्रतापगढ़ से निकलकर लखनऊ तक पहुंच गई। प्रतापगढ़ जाने वाले सपा सांसद एसपी सिंह पटेल को पुलिस ने उनके लखनऊ स्थित आवास पर ही नजरबंद कर दिया। बताया गया कि वह भी सौरभ विश्वकर्मा के परिवार से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल में शामिल होने के लिए प्रतापगढ़ जा रहे थे।
सौरभ विश्वकर्मा की मौत को लेकर अब विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। सपा नेताओं का आरोप है कि परिवार को न्याय मिलना चाहिए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। दूसरी तरफ पुलिस प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने की बात कह रहा है। फिलहाल सौरभ विश्वकर्मा की मौत का मामला प्रतापगढ़ में राजनीतिक टकराव का केंद्र बन गया है। एक ओर परिवार न्याय की मांग कर रहा है, तो दूसरी ओर सपा नेताओं को पीड़ित परिवार से मिलने से रोके जाने के बाद विपक्ष और प्रशासन के बीच तनातनी और बढ़ गई है।