पिकअप चोरी की एफआईआर के लिए 5 हजार लिए
प्रयागराज। एफआईआर दर्ज करने के एवज में रिश्वत लेने वाले जिस इंस्पेक्टर अनिल कुमार वर्मा को सस्पेंड किया गया है वो टीपी नगर के उत्तम नगर का रहने वाला है। प्रयागराज एसएसपी ने इंस्पेक्टर समेत तीन को सस्पेंड कर दिया गया। इंस्पेक्टर ने पिकअप चोरी की एफआईआर दर्ज कराने के लिए पीड़ित से 5 हजार रुपए लिए थे। जांच में दोषी मिलने पर मांडा थाना प्रभारी इंस्पेक्टर अनिल कुमार वर्मा और हेड कांस्टेबल उज्जवल कुमार को निलंबित कर दिया गया है।
पीड़ित ने मंगलवार को पुलिस आयुक्त पीयूष मोर्डिया से मिलकर लिखित शिकायत की थी। शिकायत मिलते ही पुलिस आयुक्त ने मामले को गंभीरता से लिया। मांडा थाने की टीम को तलब कर जानकारी ली गई और डीसीपी यमुनानगर को कार्रवाई के निर्देश दिए गए। मामले की जांच एसीपी मेजा को सौंपी गई है।
मांडा निवासी आशीष केशरी के मुताबिक, उनका पिकअप 13 मई को चोरी हो गया था। चोरी की रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए वह मांडा थाने पहुंचे, लेकिन कई दिनों तक ऋकफ दर्ज नहीं की गई। आरोप है कि थाना प्रभारी अनिल कुमार वर्मा ने शिकायत सुनने के बजाय उन्हें फटकार लगाकर वहां से भगा दिया। इसके बाद थाने में कंप्यूटर आॅपरेटर के रूप में तैनात हेड कांस्टेबल उज्जवल कुमार ने कथित तौर पर एफआईआर दर्ज करने के बदले 5 हजार रुपए मांगे।
पीड़ित का दावा है कि उसने 5 हजार रुपए दिए, जिसके बाद 27 मई को पिकअप चोरी की एफआईआर दर्ज की गई।
आशीष का आरोप है कि मुकदमा दर्ज होने के बाद भी पिकअप की बरामदगी के लिए पुलिस ने ठोस कार्रवाई नहीं की। वह लगातार थाने और चौकी के चक्कर लगाता रहा और पुलिस से कार्रवाई की मांग करता रहा।
शिकायत में पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया कि जब वह मुकदमे की प्रगति जानने और कार्रवाई की मांग करने थाने जाता था तो उसे ही मुकदमे में फंसाने की धमकी दी जाती थी।
मंगलवार को मामला पुलिस आयुक्त तक पहुंचने के बाद मांडा थाने में हड़कंप मच गया। पुलिस आयुक्त ने थाना प्रभारी, चौकी प्रभारी और संबंधित हेड कांस्टेबल को तलब कर पूरे मामले की जानकारी ली। इस दौरान शिकायतकर्ता से लिए गए 5 हजार रुपए वापस किए जाने की बात भी सामने आई। डीसीपी यमुनानगर विवेक चंद्र यादव ने बताया कि प्रारंभिक कार्रवाई के तहत थाना प्रभारी अनिल कुमार वर्मा और हेड कांस्टेबल उज्जवल कुमार को निलंबित कर दिया गया है। मामले की विस्तृत जांच सीओ मेजा को सौंपी गई है और उन्हें रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।
डीसीपी के मुताबिक, प्रारंभिक जांच में कंप्यूटर आॅपरेटर सिपाही द्वारा पैसे लिए जाने की बात सामने आई है। वहीं, थाना प्रभारी पर कार्रवाई में शिथिलता बरतने के आरोप भी सही पाए गए हैं।