HomeTrendingछह दिन से लापता मानसिक बीमार कांवड़िया मिला

छह दिन से लापता मानसिक बीमार कांवड़िया मिला

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हरिद्वार से लौटते समय साथियों से बिछड़ा था, पुलिस ने संभल के परिवार से मिलाया


हापुड़। कांवड़ यात्रा के दौरान अपनों से बिछड़े एक मानसिक रूप से बीमार शिवभक्त को हापुड़ पुलिस ने छह दिन बाद सकुशल उसके परिवार से मिला दिया। कोतवाली देहात पुलिस ने ततारपुर तिराहे के पास भटक रहे कांवड़िए को बरामद कर संभल में रह रहे उसके परिजनों को सूचना दी। कांवड़िए के मिलने के बाद परिवार ने राहत की सांस ली और हापुड़ पुलिस की तत्परता की सराहना की।

थाना हापुड़ देहात प्रभारी निरीक्षक पारस मलिक ने बताया कि संभल निवासी सतीश अपने साथियों के साथ हरिद्वार से गंगाजल लेने गया था। कांवड़ लेकर वापस लौटते समय रास्ते में वह अपने साथियों से अलग हो गया। इसके बाद वह भटकते हुए हापुड़ देहात क्षेत्र के ततारपुर तिराहे तक पहुंच गया। छह दिनों तक इधर-उधर भटकने के कारण उसकी हालत काफी खराब हो गई थी। वह मानसिक रूप से परेशान और बदहवास स्थिति में था।

ततारपुर तिराहे के पास पुलिस को एक अकेला कांवड़िया भटकता हुआ दिखाई दिया। पुलिसकर्मियों ने उसे रोककर पूछताछ की। पूछताछ में उसने अपना नाम सतीश और घर संभल बताया, लेकिन मानसिक परेशानी के कारण वह अपने बारे में पूरी और सही जानकारी नहीं दे पा रहा था। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए उसकी पहचान और परिवार तक पहुंचने का प्रयास शुरू किया।

हापुड़ देहात पुलिस ने सतीश के घर का पता लगाने के लिए संभल पुलिस से संपर्क किया। जांच में पता चला कि सतीश के परिजन पिछले कई दिनों से उसकी तलाश कर रहे थे। परिजनों ने उसकी गुमशुदगी की सूचना संभल पुलिस को दी थी और रिपोर्ट भी दर्ज कराई गई थी। इसके बाद हापुड़ पुलिस ने संभल पुलिस की मदद से सतीश के परिजनों का मोबाइल नंबर हासिल किया और उन्हें उसके हापुड़ में मिलने की जानकारी दी।

सूचना मिलते ही सतीश के परिजन हापुड़ देहात थाने पहुंचे। छह दिनों से लापता सतीश को सकुशल देखकर परिवार ने राहत की सांस ली। परिजनों ने पुलिसकर्मियों का आभार जताते हुए कहा कि समय पर जानकारी मिलने से उनका खोया हुआ सदस्य वापस मिल सका। इसके बाद परिजन सतीश को अपने साथ लेकर संभल रवाना हो गए।

कांवड़ यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही को देखते हुए पुलिस लगातार सुरक्षा और सहायता व्यवस्था में जुटी है। हापुड़ पुलिस की इस कार्रवाई से एक बार फिर सामने आया कि समय पर की गई पहल और मानवीय संवेदनशीलता से बिछड़े लोगों को उनके परिवारों तक पहुंचाया जा सकता है।

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