कोचिंग सेंटर संचालकों ने मेरठ विकास प्राधिकरण उपाध्यक्ष के साथ मुलाकात कर सौंपा ज्ञापन
शारदा रिपोर्टर मेरठ। जनपद के कोचिंग, शिक्षण संस्थानों एवं लाइब्रेरी से जुड़े शिक्षकों और संचालकों ने शनिवार को मेडा कार्यालय में उपाध्यक्ष से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि वें भी विद्यार्थियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता मानते हैं तथा अग्नि सुरक्षा, भवन सुरक्षा एवं अन्य सभी आवश्यक मानकों के पालन के पूर्णत: पक्षधर हैं। हमारा उद्देश्य किसी नियम का विरोध नहीं, बल्कि सुरक्षा और शिक्षा के बीच व्यावहारिक संतुलन स्थापित करने का अनुरोध करना है।
संचालकों ने कहा कि सबसे पहले बड़े कोचिंग संस्थानों और छोटे ट्यूशन केन्द्रों के बीच अंतर को समझना आवश्यक है। छोटे ट्यूशन कंन्द्र अनेक छात्रओं, महिलाओं एवं युवाओं के लिए स्वरोजगार का एक महत्वपूर्ण माध्यम हैं। इनके संचालन पर अत्यधिक कठोर एवं अव्यावहारिक प्रतिबंध न केवल हजारों परिवारों की आय को प्रभावित करेंगे, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के महिला सशक्तिकरण, युवा आत्मनिर्भरता एवं स्वरोजगार को बढ़ावा देने के राष्ट्रीय प्रयासों की भावना पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालेंगे।
कोचिंग संचालकों ने कहा कि जिन कोचिंग में मात्र 15-20 बच्चे एक समय में पढ़ते हों, उनकी तुलना बड़े कोचिंग संस्थानों से करना गलत है। छोटे संस्थानों को नियम और मानकों में छूट देना चाहिए, जो कि व्यवहारिक भी है। इसके लिए अलग-अलग मानक बनाए जानें चाहिएं।
संचालकों ने सुझाव देते हुए कहा कि जिन शिक्षण संस्थानों में एक समय में 50 से कम विद्यार्थी अध्ययनरत हों, उन्हें आवश्यक सुरक्षा मानकों के पालन के साथ आवासीय क्षेत्र में संचालन की अनुमति प्रदान की जाए। वहीं 50 से अधिक विद्यार्थियों वाले संस्थानों के लिए व्यावसायिक परिसर में संचालन की व्यवस्था लागू की जा सकती है। इससे सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी और हजारों छोटे ट्यूशन केन्द्रों का अस्तित्व भी सुरक्षित रहेगा।
संचालकों ने मानकों को पूरा करने के लिए एक माह का समय मांगा। उन्होंने कहा कि इस दौरान कांचिंग संस्थानों को बंद न किया जाए। क्योंकि कोचिंग संस्थान बंद होने से बच्चों के भविष्य में प्रतिकूल असर पड़ेगा।