HomeTrendingहिंद महासागर में भारत का मास्टरस्ट्रोक देखेगी दुनिया

हिंद महासागर में भारत का मास्टरस्ट्रोक देखेगी दुनिया

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नीरज कुमार दुबे


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 27 से 29 जून तक होने वाली सेशेल्स यात्रा हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की सामरिक सक्रियता और वैश्विक भूमिका को नई दिशा देने वाली महत्वपूर्ण कूटनीतिक पहल मानी जा रही है। सेशेल्स के राष्ट्रीय दिवस की स्वर्ण जयंती में मुख्य अतिथि के रूप में मोदी की भागीदारी यह संकेत देती है कि भारत अब हिंद महासागर में अपने मित्र देशों के साथ सुरक्षा, विकास और समुद्री सहयोग को और मजबूत करने की रणनीति पर तेजी से आगे बढ़ रहा है।

हम आपको बता दें कि सेशेल्स 115 द्वीपों वाला छोटा द्वीपीय राष्ट्र है, लेकिन इसकी भौगोलिक स्थिति अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह मोजाम्बिक चैनल के निकट उन समुद्री मार्गों पर स्थित है, जहां से विश्व व्यापार का बड़ा हिस्सा गुजरता है। इसी कारण अमेरिका, चीन और यूरोपीय शक्तियां भी इस क्षेत्र में प्रभाव बढ़ाने का प्रयास कर रही हैं। ऐसे समय में भारत का सेशेल्स के साथ संबंध मजबूत करना हिंद महासागर में शक्ति संतुलन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

इस यात्रा का सबसे बड़ा आकर्षण भारत द्वारा सेशेल्स तटरक्षक बल को एक तीव्र गश्ती पोत सौंपना है। इससे पहले भारत दो डोर्नियर विमान, कई गश्ती नौकाएं तथा तटीय निगरानी राडार प्रणाली भी सेशेल्स को प्रदान कर चुका है। भारतीय रक्षा कर्मियों की तैनाती और संयुक्त सैन्य अभ्यासों ने दोनों देशों के रक्षा सहयोग को नई ऊंचाई दी है। समुद्री डकैती, मादक पदार्थों की तस्करी, अवैध मछली पकड़ने तथा अन्य अंतरराष्ट्रीय अपराधों से निपटने में सेशेल्स भारत पर भरोसा करता है। यही कारण है कि यह यात्रा हिंद महासागर में सामूहिक सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक निर्णायक कदम मानी जा रही है।

हम आपको बता दें कि भारत की महासागर दृष्टि के अंतर्गत सेशेल्स को विशेष स्थान प्राप्त है। भारत अब केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि वह पूरे हिंद महासागर क्षेत्र में एक भरोसेमंद सुरक्षा साझेदार की भूमिका निभा रहा है। सेशेल्स का कोलंबो सुरक्षा सम्मेलन में पूर्ण सदस्य बनने का संकेत भी इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा है। इस समूह में भारत, मालदीव, मॉरीशस और श्रीलंका पहले से शामिल हैं। यदि सेशेल्स भी पूर्ण सदस्य बनता है, तो हिंद महासागर में भारत के नेतृत्व वाली क्षेत्रीय सुरक्षा संरचना और मजबूत होगी।

हम आपको बता दें कि मोदी और सेशेल्स के राष्ट्रपति पैट्रिक हरमिनी के बीच होने वाली वार्ता में रक्षा सहयोग के साथ ऊर्जा, स्वास्थ्य, डिजिटल शासन, समुद्री निगरानी और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे विषयों पर भी चर्चा होगी। फरवरी 2026 में भारत ने सेशेल्स के लिए 175 मिलियन डॉलर के विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा की थी, जिसमें ऋण सहायता और अनुदान दोनों शामिल हैं। इसके अंतर्गत स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास, सौर ऊर्जा, समुद्री सुरक्षा और आधारभूत ढांचे से जुड़ी अनेक परियोजनाएं शुरू की जा रही हैं। यह दशार्ता है कि भारत केवल सामरिक हितों तक सीमित नहीं है, बल्कि वह विकास साझेदारी के माध्यम से भी अपने मित्र देशों के साथ दीर्घकालिक संबंध बना रहा है।

हम आपको बता दें कि भारत और सेशेल्स के संबंध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी अत्यंत गहरे हैं। वर्ष 1770 में भारतीयों का पहला समूह वहां पहुंचा था। आज लगभग 15 हजार भारतीय मूल के लोग वहां रहते हैं, जो कुल जनसंख्या का बड़ा हिस्सा हैं। गुजराती और तमिल समुदाय व्यापार, निर्माण और अन्य क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। मोदी का भारतीय समुदाय से संवाद दोनों देशों के सामाजिक संबंधों को और मजबूत करेगा।

यह यात्रा वैश्विक राजनीति के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। पिछले कुछ वर्षों में चीन ने हिंद महासागर क्षेत्र में अपने प्रभाव का तेजी से विस्तार किया है। चीन की समुद्री परियोजनाएं, बंदरगाह निवेश और सामरिक उपस्थिति भारत के लिए चिंता का विषय रही हैं। ऐसे में सेशेल्स जैसे देशों के साथ भारत का गहरा सहयोग यह स्पष्ट संदेश देता है कि हिंद महासागर में भारत अपनी पारंपरिक भूमिका को और सशक्त बना रहा है। भारत की नीति अब केवल पड़ोसी प्रथम तक सीमित नहीं रही, बल्कि वह ग्लोबल साउथ के नेतृत्वकर्ता के रूप में भी उभरना चाहता है। सेशेल्स यात्रा इसी व्यापक रणनीतिक सोच का हिस्सा है।

इस यात्रा का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि प्रधानमंत्री मोदी सेशेल्स की राष्ट्रीय सभा के विशेष अधिवेशन को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री होंगे। यह दोनों देशों के राजनीतिक विश्वास और घनिष्ठता का प्रतीक माना जा रहा है। भारतीय नौसेना के युद्धपोतों और रक्षा दल की भागीदारी भी यह दिखाती है कि दोनों देशों के संबंध केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि रणनीतिक साझेदारी में बदल चुके हैं।

बहरहाल, प्रधानमंत्री मोदी की सेशेल्स यात्रा हिंद महासागर में भारत की बढ़ती सामरिक शक्ति, समुद्री सुरक्षा नीति और वैश्विक प्रभाव का महत्वपूर्ण संकेत है। यह यात्रा भारत को क्षेत्रीय सुरक्षा संरचना के केंद्र में स्थापित करने के साथ-साथ चीन की बढ़ती सक्रियता के बीच संतुलन बनाने में भी सहायक होगी। विकास सहायता, रक्षा सहयोग, सांस्कृतिक संबंध और समुद्री साझेदारी के माध्यम से भारत यह संदेश दे रहा है कि वह हिंद महासागर क्षेत्र में स्थिरता, सुरक्षा और साझा समृद्धि का सबसे भरोसेमंद साझेदार बनना चाहता है।

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