दस्तावेज लेखकों की हड़ताल से रोजाना हो रहा लाखों के राजस्व का नुकसान
शारदा रिपोर्टर मेरठ। उत्तर प्रदेश में लागू की गई नई ई-रजिस्ट्री व्यवस्था के विरोध में मेरठ में दस्तावेज लेखकों और वकीलों का अनिश्चितकालीन धरना और हड़ताल लगातार सोमवार को भी जारी है। धरना प्रदर्शन कर रहे दस्तावेज लेखकों का आरोप है कि, सरकार इस प्रक्रिया का निजीकरण कर रही है, जिससे उनके सामने भविष्य में रोजी-रोटी का गहरा संकट पैदा हो गया है।
नई ई-रजिस्ट्री व्यवस्था के विरोध में मंगलवार को भी मेरठ के सभी रजिस्ट्री कार्यालयों पर तालाबंदी जारी रही। अधिवक्ताओं, दस्तावेज लेखकों तथा स्टांप वेंडरों ने कार्य बहिष्कार कर धरना दिया। उन्होंने ई-रजिस्ट्री को काला कानून बताकर आंदोलन और तेज करने का ऐलान किया। इस दौरान आंदोलनकारियों ने ई-रजिस्ट्री व्यवस्था को काला कानून करार दिया।
समिति के संयोजक परवेज आलम ने कहा कि मेरठ समेत प्रदेश के 22 जिलों में रजिस्ट्री का काम पूरी तरह ठप है और सरकार उनकी मांगों की लगातार अनदेखी कर रही है। कहा कि वर्तमान में भी रजिस्ट्रियां डिजिटल माध्यम से हो रही हैं, लेकिन पोर्टल की खामियों के कारण आमजन को परेशानी होती है।
प्रदेश संरक्षक संजय गुप्ता ने बताया कि मेरठ में रजिस्ट्री कार्य से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग एक हजार से भी ज्यादा लोग जुड़े हुए हैं। यदि यह कार्य निजी संस्था को सौंपा गया तो हजारों लोगों के रोजगार पर संकट खड़ा हो जाएगा और उनके परिवार के सामने संकट की स्तिथि होगी। वहीं बिजनौर से आए दस्तावेज लेखक संगठन के अध्यक्ष सोमपाल ने कहा कि सरकार को यदि हम लोगों को इस कार्य से हटाना है तो हमें उचित मुआवजा दे अन्यथा हम लोग आत्महत्या के लिए मजबूर होंगे।
बता दें कि, सोमवार को समाजवादी पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल रजिस्ट्री कार्यालय पहुंचा और दस्तावेज लेखकों को अपना समर्थन दिया। इस दौरान सपा नेताओं ने इस नई ई-रजिस्ट्री व्यवस्था को गलत बताते हुए इसका पुरजोर विरोध किया। इसके साथ ही अधिवक्ता भी खुलकर दस्तावेज लेखकों के साथ आ गए हैं।