नई दिल्ली। सांसद डिंपल यादव ने कहा कि महिला आरक्षण एक मुखौटा है, जिसके जरिए सरकार परिसीमन करना चाहती है और अपनी स्थिति मजबूत करना चाह रही है। महिलाओं को आरक्षण देने वाला बिल 2023 में ही पास हो चुका है। सरकार जान-बूझकर इसमें देरी कर रही है। डिंपल यादव ने कहा कि सरकार संविधान में बदलाव क्यों कर रही है। पहले यह बिल लाया गया था, तब सभी पार्टियों ने इसका समर्थन किया था। उस समय यह कहा गया था कि जातिगत जनगणना के बाद नया परिसीमन होगा और महिलाओं को आरक्षण दिया जाएगा, लेकिन अब सरकार इसमें बदलाव कर रही है और 2011 के आंकड़ों के आधार पर परिसीमन करना चाह रही है।
अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर ने कहा कि चुनाव के कारण महिला आरक्षण का यह बिल लाया जा रहा है। इसकी आड़ में सरकार परिसीमन करना चाहती है। महिला आरक्षण बिल लागू होना चाहिए, लेकिन इसमें पूरी पारदर्शिता होनी चाहिए। सरकार को बिल में यह साफ तौर पर बताना चाहिए कि कौन सी जनगणना के आंकड़ों के आधार पर परिसीमन होगा। सरकार हमें आरक्षण देना चाहती है तो मौजूदा सीटों में ही दे।
सांसद अनुप्रिया पटेल ने कहा कि अगर सीटों की संख्या बढ़ेगी तो सभी को इसका फायदा मिलेगा। कई दलों के पास सिर्फ एक ही सीट है। अगर मौजूदा सीटों में पर इसे लागू किया गया तो इन दलों को परेशानी होगी। वहीं, सांसदों की संख्या बढ़ने पर सभी दलों को फायदा होगा।
महिला आरक्षण और परिसीमन समेत तीन बिलों पर आज संसद में वोटिंग होगी। इन तीन बिलों को पास कराने के लिए सरकार ने संसद का विशेष सत्र बुलाया है। विपक्ष के नेता इस बिल के समय को लेकर सवाल खड़े कर रहे हैं। वहीं, सरकार का आरोप है कि विपक्षी दल महिला आरक्षण के खिलाफ हैं। सरकार ने तीन दिन का विशेष सत्र बुलाया है। इस विषय में लोकसभा में गुरुवार को भी जमकर बहस हुई थी और अब इस मामले में वोटिंग होनी है। इस बीच सरकार ने महिला आरक्षण बिल पर नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया है। कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने सरकार से यह बिल वापस लेने और सभी पार्टियों की बैठक बुलाकर आम सहमति बनाने की बात की है।
सरकार ने लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने से संबंधित ऐतिहासिक ‘संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026’, ‘परिसीमन विधेयक, 2026’ और ‘संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026’ गुरुवार को संसद के निचले सदने में पेश किए थे। इन विधेयकों पर देर रात एक बजकर 20 मिनट तक चर्चा हुई और शुक्रवार सुबह इन पर चर्चा आगे बढ़ाई जाएगी। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि सरकार महिला आरक्षण के नाम पर परिसीमन कर अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने और अन्य पिछड़े वर्गों से उनकी हिस्सेदारी छीनने की तैयारी में है। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण को परिसीमन से मुक्त करके 2029 से ही लोकसभा की वर्तमान संख्या 543 के आधार पर लागू किया जा सकता है।