– प्रेसवार्ता कर आरटीआई एक्टिविस्ट संदीप पहल एडवोकेट ने प्रशासन, नगर निगम और जिला पंचायत पर लगाए आरोप।
शारदा रिपोर्टर मेरठ। शहर के प्रांतीय मेला नौचंदी को जानबूझकर विफल करने और लाखों का भ्रष्टाचार होने का आरोप लगाते हुए बुधवार को आरटीआई कार्यकर्ता डा. संदीप पहल एडवोकेट ने वेस्टर्न कचहरी रोड स्थित अपने आवास पर प्रेसवार्ता की। इस दौरान उन्होंने बताया कि, ऐतिहासिक नौचंदी मेला लगभग 350 साल से मेरठ में निरंतर लग रहा है। मेरठ का नौचंदी मेला 2021 में गजट के माध्यम से प्रांतीय मेला घोषित किया गया था। इस लिए इस मेला जिलाधिकारी की देख-रेख में ही चलाये जाने की बाध्यता है। जबकि, नौचन्दी मेले के सुचारू संचालन के लिए शासन लाखों रुपया जिला प्रशासन को देता है।


उन्होंने कहा कि, वर्ष 2025 में नौचन्दी मेले के लिए लगभग 60 लाख रुपया शासन ने दिया था। इस वर्ष नौचंदी मेले का उद्घाटन दिनांक 16 मार्च को किया गया। परम्परा के अनुसार होली के बाद दूसरे रविवार को नौचन्दी मेला का उद्घाटन कर प्रारम्भ होता है और लगभग एक महीना चलता है। कुछ वर्षों पहले नौचन्दी मेले की भूमि के स्वामित्व की लड़ाई के चलते नौचन्दी मेला एक वर्ष नगर निगम लगवाता/ चलाता है और एक वर्ष जिला पंचायत लगवाता/ चलाता है।
उल्लेखनीय है कि नौचन्दी मेले को प्रान्तीया मेला घोषित किए जाने के बाद इस मेले को लगाने की जिम्मेदारी जिलाधिकारी, मेरठ यानि जिला प्रशासन की है। नगर निगम और जिला पंचायत का इस मेले में हस्तक्षेप गैर कानूनी है, जिला प्रशासन सिर्फ उनके संसाधनों का उपयोग कर सकता है। क्या सम्भव है कि किसी भी खेल आयोजन का उद्घाटन होने से एक महीने बाद खेल प्रतिस्पर्धा प्रारम्भ हो, नहीं ऐसा सम्भव नहीं है। परन्तु दुनिया का एक मात्र उदहारण इस नौचंदी मेला को बना दिया गया है कि, मेले का उद्घाटन तो होली के बाद दूसरे रविवार को हो गया, परन्तु मेला एक महीने बाद शुरू होगा।
उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसा इसलिए होगा कि जब सब ठेकेदार दुकानदार, बिजली वाला, झूले, तहबजारी, साईकल स्कूटर कार स्टैण्ड वाले आदि से कमीशन की सैटिंग बैठ जायेगी, यह खेल हर वर्ष होता है। उन्होंने कहा कि, कमीशनखोरी के अलावा इस ऐतिहासिक नौचंदी मेले में बहुत सारे लोगों को रोजगार मिलता है, शहर व दूर-दूर से ग्रामीण क्षेत्र से लोग मेले में घूमने, खरीदारी करने आते हैं, मनोरंजन का सुलभ सस्ता साधन रहता है।
जिला प्रशासन की यह व्यक्तिगत जिम्मेदारी है कि इस मेले का विस्तार हो और इसकी गरिमा बनी रहे, परन्तु ऐसा होता हुआ नहीं लगता है। मेला मैदान पर कब्जे निरन्तर बढ़ते ही जा रहे हैं।कुछ अलग-अलग विभागों के प्रशासनिक अधिकारी और समय-समय पर बदलने वाली सत्ता के स्थानीय नेता मिलकर अपने निजी स्वार्थ की पूर्ति करते हुए नौचंदी मेले को असफल करने में लगे रहते हैं।
संदीप पहल ने कहा कि उनके इस आरोप की पुष्टि रामलीला मैदान दिल्ली रोड मेरठ में दीपक जैन द्वारा निजी मेला लगाने की फर्जी अनुमतियां दिये जाने से होती है। दीपक जैन बिना सारे विभागों की संचालन की अनुमति लिए बिना मेला चला लेता है और रुपयों की अच्छी बंदर बांट होती है। इन अवैध मेलों के सम्बन्ध में मैंने पूर्व में भी कई शिकायतें प्रशासन को दी है कार्यवाही शून्य रहती है।
उन्होंने कहा कि, नौचंदी मेले की प्रतिष्ठा को धूमिल होने से बचने के लिए इस दिल्ली रोड पर चल रहे मेले को दी गयी सारी अनुमति को निरस्त करते हुए मेला बन्द कराया जाये। उन्होंने कहा कि, नौचंदी मेले की गरिमा बचाने रखने के लिए उन्होंने आयुक्त, मेरठ मण्डल मेरठ, जिलाधिकारी मेरठ आदि को 14-03-2026 को पत्र भेजते हुए दिल्ली रोड़ पर चल रहे मेले को बन्द कराने का आग्रह किया था, जिस पर सूचना का अधिकार अधिनियम के अन्तर्गत कार्यवाही की सूचना भी मांगी है।
क्योंकि, मेरठ में संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों को परम्पराओं को बचाते हुए सामाजिक कार्यों से कोई सरोकार नहीं है। उन्होंने साफ-साफ कह दिया कि, वह नौचंदी मेले से सम्बन्धित अभिलेख एकत्रित कर प्रत्येक वर्ष किए जा रहे आर्थिक घोटाले का पर्दाफाश करेंगे।

