डिएगो गार्सिया में अमेरिका और ब्रिटेन के अड्डे को बनाया निशाना
नई दिल्ली। मिडिल-ईस्ट में जारी जंग की हलचल अब हिंद महासागर में भी देखने को मिल रही है। अमेरिकी अधिकारियों ने बताया है कि ईरान ने चागोस द्वीपसमूह में डिएगो गार्सिया में मौजूद संयुक्त अमेरिकी-ब्रिटेन सैन्य अड्डे की ओर दो मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा था कि वाशिंगटन तेहरान के खिलाफ अपने सैन्य अभियान को बंद करने के बहुत करीब है। इसके अलावा ब्रिटेन की ओर से अमेरिका को अपने सैन्य अड्डे इस्तेमाल किए जाने की इजाजत देने पर ईरान ने ब्रिटेन के खिलाफ नाराजगी भी जाहिर की थी।
वॉल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक, एक मिसाइल उड़ान के दौरान विफल हो गई, जबकि एक अमेरिकी युद्धपोत ने दूसरी मिसाइल पर एसएम-3 इंटरसेप्टर लॉन्च किया। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि अवरोधन सफल रहा या नहीं। रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया कि मिसाइलें कब दागी गईं। बता दें कि इंटरसेप्टर का उपयोग अमेरिकी नौसेना द्वारा छोटी से मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों को नष्ट करने के लिए किया जाता है। यह विस्फोटक हथियार के बजाय सरासर बल पर निर्भर करता है। इसका किल व्हीकल 600 मील प्रति घंटे की रफ्तार से यात्रा करने वाले 10 टन के ट्रक की ताकत से लक्ष्य पर हमला करता है।
बता दें कि ईरान के द्वारा हमले का यह प्रयास बेहद अहम माना जा रहा है। क्योंकि डिएगो गार्सिया ईरान से लगभग 4,000 किलोमीटर दूर स्थित है। इससे पता चलता है कि ईरान की मिसाइल रेंज सार्वजनिक रूप से बताई गई सीमा से कहीं अधिक हो सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने पिछले महीने कहा था कि देश ने अपनी मिसाइल रेंज को 2,000 किलोमीटर तक सीमित कर दिया है। डिएगो गार्सिया का बेस संयुक्त राज्य अमेरिका और यूनाइटेड किंगडम द्वारा संयुक्त रूप से संचालित एक प्रमुख रणनीतिक सुविधा है।