– निगम उपाध्यक्ष को लेकर रणनीति बनाने में जुटे भाजपाई, बागी पार्षद संजय सैनी बेफिक्र।
शारदा रिपोर्टर मेरठ। किस की होली रंगीन होगी और किसकी होगी बदरंग यह तय होने में अब चंद घंटे बाकि रह गए हैं। 28 फरवरी शनिवार को प्रस्तावित नगर निगम उपाध्यक्ष का चुनाव तय करेगा किसमें कितना दम है।

चुनाव की बात करें तो कार्यकारिणी सदस्यों के चुनाव में हुई किरकिरी के बाद उपाध्यक्ष के चुनाव में भाजपा नेता फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं। वैसे जहां तक रणनीति की बात है, तो उपाध्यक्ष चुनाव को लेकर अभी तक भाजपा भी अपना कोई एक पार्षद तय नहीं कर पायी है। ना ही भाजपा नेता यह कहने की स्थिति में है कि, अमुक का नाम आगे चल रहा है।
वहीं, दसरी ओर विपक्ष की ओर से इस वक्त तक कार्यकारिणी के सदस्य संजय सैनी का नाम आगे चल रहा है। हालांकि, चुनावी राजनीति में कुछ भी पक्का नहीं होता, लेकिन संजय सैनी कह चुके हैं कि, वो उपाध्यक्ष का चुनाव लड़ेंगे।
वहीं, माना जा रहा है कि, मैदान में भाजपा के आठ दावेदार हैं तो वहीं चुनाव से एन वक्त पहले नाम तय किया जाएगा। जिसके चलते विपक्ष भी रणनीति बनाने में जुटा हुआ है। हालांकि, सत्ताधारी दल भाजपा से फिलहाल छह पार्षदों के मैदान में होने की जानकारी सूत्रों ने दी है। बताया गया है कि करीब छह ऐसे पार्षद हैं जो कार्यकारिणी के अंकगणित के चलते खुद को उपाध्यक्ष माने बैठे हैं। जानकारों की मानें तो ये सभी छह पार्षद सारा काम-धाम छोड़कर पार्टी के नेताओं और कोर कमेटी के पदाधिकारियों के घर की परिक्रमा कर रहे हैं। खुद को उपाध्यक्ष माने बैठे ये सभी छह पार्षद सांसद, विधायक महापौर और महानगर संगठन के नेताओं के चक्कर काट रहे हैं। उन्हें संगठन के प्रति अपनी निष्ठा का वास्ता दे रहे हैं। जबकि, कार्यकारिणी के अंक गणित की बात करें तो भाजपा के पास आठ वोट हैं। जबकि पांच वोट की ताकत है।
सूत्रों की मानें तो पूर्व में कुछ तय नहीं है। जो कुछ तय होगा कोर कमेटी की बैठक के बाद ही तय होगा और कोर कमेटी की बैठक कार्यकारिणी चुनाव से पहले होनी है। इससे पहले नहीं बताया जा सकता कि, पार्टी का अधिकृत प्रत्याशी कौन होगा। वहीं, दूसरी ओर भाजपा के एक अन्य सूत्र की मानें तो कई बार ऐसा भी हुआ है कि भाजपा की कोर कमेटी ने जिस नाम पर मोहर लगायी वो नाम भी ड्रॉप कर दिया गया और संघ परिवार की तरफ से जो नाम आया उसकी घोषणा कर दी गयी।
भाजपा में पहले से कुछ नहीं होता ना ही किसी एक शख्स भले ही कितना ही प्रभावशाली क्यों ना हो, उसकी मंशा के अनुसार काम होता है। यह तो निगम उपाध्यक्ष को छोटा सा चुनाव है, भाजपा में तो विधायक और सांसद के टिकट को लेकर पहले कुछ नहीं कहा जा सकता। इसलिए निगम कार्यकारिणी उपाध्यक्ष के जहां तक नाम की बात है तो वह चुनाव से चंद मिनट पहले ही बताया जाएगा। यहां तक कि कोर कमेटी ने क्या फैसला लिया इसकी भी जानकारी बाहर नहीं आएगी।
रणनीति बनाने में जुटा है विपक्ष
निगम कार्यकारिणी उपाध्यक्ष के चुनाव की बात जहां तक तो इसको विपक्ष भी बिलकुल भी हलके में नहीं ले रहा है। कार्यकारिणी में जहां तक विपक्ष की बात है तो संजय सैनी समेत उनके अभी पांच मत हैं। जहां तक चुनाव की बात है तो कम से कम तीन वोट का और इंतजाम करना होगा और यह काम विपक्ष के लिए भी आसान नहीं है, लेकिन जहां तक राजनीति की बात है तो राजनीति में ना तो कोई स्थायी मित्र होता है ना शत्रु होता है। कई बार मौका और दस्तूर देखकर फैसला लिया जाता है, जैसा कि कार्यकारिणी के सदस्यों के चुनाव में हुआ। भाजपा के पास अच्छा खासा बहुमत होते हुए भी अजय चंद्रा नहीं जीत पाए और भाजपा से निष्कासित किए गए संजय सैनी बाजी मार गए। ऐसा ही कुछ उपाध्यक्ष के चुनाव में नजर आ रहा है। कुल मिलाकर भाजपा और विपक्ष दोनों के लिए ही बेहद क्रिटिकल हालात बने हुए हैं।
बेफ्रिक नजर आए संजय सैनी
विपक्ष की ओर से संजय सैनी के नाम लिया जा रहा है। लेकिन संजय की बात करें तो वह चुनाव को लेकर बेफ्रिक नजर आए। शुक्रवार को वह अपने वार्ड के सफाई अभियान में शामिल रहे। उनको देखकर लग नहीं रहा था कि चुनाव को लेकर कोई टेंशन है।

