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Friday, February 20, 2026
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मेरठ से बड़ी खबर: रघुनंदन ज्वैलर्स से एक करोड़ की ठगी में बिहार से जुड़े तार

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– प्रवीण शर्मा ने अपने एक करोड़ रुपये वसूली को दी तहरीर।

– रघुनंदन ज्वैलर्स और प्रवीण शर्मा दोनों पर आयकर की नजर।

शारदा रिपोर्टर मेरठ। शहर में नामचीन दो कारोबारियों के बीच एक करोड़ रुपये के सोने के सौदे ने गंभीर विवाद को जन्म दे दिया है। व्हाट्सएप कॉल से शुरू हुआ यह सौदा नकद भुगतान, फर्जी पहचान और फरार युवक के बाद अब कई विभागों तक पहुंच गया है। इस घटना के बाद दोनों पक्ष थाने में अलग-अलग तहरीरें दे रहे हैं। अब आशंका जताई जा रही है कि, प्रवर्तन निदेशालय ईडी, आयकर विभाग, जीएसटी, बीआईएस और पुलिस भी मामले में जांच कर सकते हैं।

 

Raghunandan Jewellers

 

दरअसल, बीती बुधवार दोपहर लगभग एक बजे कृष्णा नामक व्यक्ति ने रघुनंदन ज्वैलर्स प्राइवेट लिमिटेड में व्हाट्सएप कॉल कर लगभग एक करोड़ रुपये के सोने के आभूषण खरीदने की इच्छा जताई। खुद शोरूम न आ पाने की बात कहते हुए उन्होंने अपने भतीजे को भेजा। कुछ देर बाद युवक शोरूम पहुंचा और खुद को कृष्णा का भतीजा बताते हुए 600-650 ग्राम सोने के जेवर पसंद किए।

भुगतान के लिए कृष्णा ने आॅनलाइन ट्रांजैक्शन असमर्थता जताई और नकद भेजने का आदेश दिया। करीब आधे घंटे बाद चार युवक शोरूम पहुंचे, जिनमें दो मेरठ निवासी और दो बिहार के मुजफ्फरपुर के बताए गए। उन्होंने मिलकर नकद एक करोड़ रुपये जमा किए।

इसके बाद चयनित जेवर कथित भतीजे को सौंप दिए गए। लेकिन जैसे ही युवक जेवर लेकर निकला, नकद देने वाले चारों युवक अचानक भुगतान रोकने लगे। उनका दावा था कि, वे सोना खरीदने नहीं आए थे, बल्कि अपने बैंक खाते में सिर्फ एक करोड़ रुपये की एंट्री दिखाने के लिए नकद दिए।

वहीं, इस मामले में रुड़की रोड निवासी कारोबारी प्रवीण शर्मा का कहना है कि, उन्हें भी किसी कृष्णा ने शोरूम भेजा था। शोरूम प्रबंधक तन्मय अग्रवाल का कहना है कि, भुगतान के बदले जेवर वही युवक ले गया जिसे भेजा गया था। इसी बात को लेकर शोरूम में दोनों पक्षों के लोगों में नोक-झोंक भी हुई। आपको बता दें कि, सोने के आभूषणों की बिक्री में सरकारी नियम बेहद सख्त हैं।

केवल बीआईएस ही प्रमाणित हॉलमार्क वाले जेवर ही बेचे जा सकते हैं। बिना बिल और खरीदार का सत्यापन किए हॉलमार्क जेवर बेचना नियमों के खिलाफ है। बड़े लेनदेन में खरीदार की पहचान, बिल, जीएसटी और आयकर की जानकारी अनिवार्य होती है।

ऐसे में सवाल उठ रहा है कि, क्या नकद एक करोड़ रुपये लेना नियमों के दायरे में था और जेवर लेने वाले का सत्यापन क्यों नहीं हुआ।

सूत्रों के अनुसार, रघुनंदन ज्वैलर्स ने नकद एक करोड़ लेकर 600-650 ग्राम सोना बेचा। वहीं, प्रवीण शर्मा के मुताबिक उन्होंने सिर्फ बैंक एंट्री के लिए पैसे दिए थे। इस स्थिति से हवाला कनेक्शन की आशंका जताई जा रही है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि, ठगी का वास्तविक शिकार कौन है और दोषी कौन।

पांच विभागों की संभावित जांच

इस प्रकरण में अब पांच विभागों की संभावित जांच चर्चा में है। प्रवर्तन निदेशालय, आयकर विभाग, जीएसटी विभाग, भारतीय मानक ब्यूरो, पुलिस प्रशासन। यदि ये एजेंसियां जांच में उतरती हैं तो न केवल ठगी की सच्चाई सामने आएगी, बल्कि हवाला के जरिए काले धन को सफेद करने के संभावित नेटवर्क का भी खुलासा हो सकता है।

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