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किसानों के लिए बडी खुशखबरी

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  • इसी माह चालू होंगी मुजफ्फरनगर की चीनी मिलें
  • मुजफ्फरनगर की टिकोला शुगर मिल से जुड़े हैं मेरठ के हजारों किसान

शारदा न्यूज, मेरठ। पैसे के अभाव में कोल्हूओं पर अपना गन्ना औने-पौने भाव में बेचने पर मजबूर गन्ना किसानों के लिए बडी खुशखबरी आई है। जनपद की चीनी मिलों में जल्द पेराई शुरु होगी, इसके लिए गन्ना विभाग भी सक्रिय हो गया है।

गन्ना विभाग ने चीनी मिलों के नए पेराई सत्र को लेकर कवायद शुरू कर दी है। लगभग छह चीनी मिलें इसी माह के अंत में पेराई शुरू कर देंगी। जबकि दो चीनी मिलों में नवंबर के पहले सप्ताह में पेराई प्रारंभ होने की संभावना है। गन्ना विभाग ने मिलों से पेराई की डेट मांगी है। उधर, कोल्हू में किसानों को सिर्फ 250 से तीन सौ रुपये प्रति क्विंटल का भाव ही मिल रहा है।

गन्ने का पेराई सत्र इसी महीने शुरू होने की संभावना है। जिले में कोल्हुओं ने गन्ने की पेराई प्रारंभ कर दी है और चार अक्तूबर से मंडी में गुड़ की आवक शुरू हो गई है। चीनी मिलों में गन्ने की पेराई को लेकर तैयारियां पूरी हो गई है। चीनी मिले गन्ने की रिकवरी को लेकर लगातार सैंपल ले रही है।

खतौली चीनी मिल के सैंपल में गन्ने की रिकवरी सवा आठ प्रतिशत तक पहुंच गई है। इस माह के अंत तक इसके दस प्रतिशत तक पहुंचने की संभावना है।

गन्ना विभाग के अनुसार जिले की पांच चीनी मिलों खतौली, मंसूरपुर, टिकौला, खाईखेड़ी, मोरना और भैसाना में अक्तूबर के अंतिम सप्ताह में पेराई सत्र का शुभारंभ हो जाएगा। जबकि रोहाना कलां और तितावी में पेराई सत्र नवंबर माह के प्रथम सप्ताह में प्रारंभ होने की संभावना है। जिला गन्ना अधिकारी संजय सिसोदिया का कहना है कि हमारा पूरा प्रयास है कि नया पेराई सत्र समय से शुरू हो।

प्रबंधक ने बताया कि अक्तूबर के अंतिम सप्ताह में पेराई सत्र का शुभारंभ होगा।

 

टिकोला चीनी मिल से जुड़े हैं मेरठ के हजारों किसान

मुजफ्फरनगर जिले में मौजूद टिकोला शुगर मिल से मवाना सहकारी गन्ना समिति के हजारों किसान जुड़े हुए हैं। जिसमें हस्तिनापुर खादर क्षेत्र टिकोला शुगर मिल को गन्ना सप्लाई करता है। हालांकि बाढ़ में खादर क्षेत्र में गन्ने की फसल में बड़ा नुकसान है।

 

शुगर मिल के चलने से समय पर होगी गेहूं की बुवाई

खादर क्षेत्र के किसानों के खेतों में खड़ी बाढ़ में नष्ट हुई गन्ने की फसल को शुगर मिल तक पहुंचाने का विकल्प होगा। किसान अपने खेतों को खाली कर समय पर तैयार कर उनमें गेहूं की बुवाई करेंगे। जिससे उन्हें अगली फसल समय पर बुवाई में आसानी होगी और गेहूं की फसल से उनकी आर्थिक स्थिति में कुछ सुधार होने की उम्मीद है।

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