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Saturday, February 7, 2026
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मेरठ: नायक पवन कुमार को नम आंखों से दी विदाई, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल

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– इंफाल में 21 असम राइफल्स में तैनात नायक का बॉर्डर पर परेड के दौरान ह्दयघात से निधन।

शारदा रिपोर्टर मेरठ। इंचोली थाना क्षेत्र के ग्राम बना निवासी नायक पवन कुमार (21 असम राइफल्स) का शुक्रवार को निधन हो गया। इम्फाल बॉर्डर पर परेड के दौरान उन्हें अचानक दिल का दौरा पड़ा था। देश सेवा में समर्पित नायक का पार्थिव शरीर शनिवार सुबह उनके पैतृक गांव पहुंचा।
जैसे ही सेना के जवान तिरंगे में लिपटे पार्थिव शरीर को वाहन से लेकर उतरे, पूरा माहौल ‘भारत माता की जय’ और ‘पवन कुमार अमर रहे’ के नारों से गूंज उठा। इस दौरान हर आंख नम थी और पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई।

 

 

ड्यूटी पर रहते हुए हुए इस असमय निधन की खबर जैसे ही गांव पहुंची, परिवार और क्षेत्र में गहरा शोक छा गया था। शनिवार को जब देश के इस वीर का पार्थिव शरीर गांव लाया गया, तो अंतिम दर्शन के लिए जनसैलाब उमड़ पड़ा।

परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। सबसे मार्मिक दृश्य तब दिखा, जब उनके मासूम बच्चे अपने पिता को निहार रहे थे। 12 वर्षीय बड़ा बेटा अभिषेक गुमसुम खड़ा था, जबकि 10 वर्षीय प्रियांशु और 8 साल की वंशिका को शायद अभी पूरी तरह समझ भी नहीं आया था कि उनके सिर से पिता का साया उठ चुका है। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद हर शख्स की आंखें भर आईं।

गांव वालों ने नम आंखों से अपने लाल को विदाई दी। उनके दिल में गर्व था कि पवन कुमार ने देश की सेवा करते हुए अपनी अंतिम सांस तक कर्तव्य का पालन किया। नायक पवन कुमार भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनका साहस, समर्पण और देशभक्ति हमेशा याद रखी जाएगी।
शहीद नायक को उनके बड़े बेटे अभिषेक ने दाग लगाकर अंतिम विदाई दी। इस दौरान आसपास खड़े लोगों की आंखों से आंसू छलकने लगे। परिवार सहित गांव के लोग नायक पवन की पुरानी यादों को याद कर रो रहे थे।

नायक पवन कुमार के तीनों बच्चे अभिषेक, प्रियांशु और वंशिका सहित उनकी पत्नी सुंदरी का रो-रो कर बुरा हाल था। पत्नी बार-बार बेहोश हो रही थी। परिवार के लोग उन्हें समझाने का प्रयास कर रहे थे, जिसके चलते पूरे गांव में शोक छा गया।

गांव के ही रहने वाले विजयपाल ने बताया कि पवन उनका दोस्त था। उन्होंने बताया कि पवन बचपन से ही पढ़कर देश की करने की बात कहता था। जब भी छुट्टी पर गांव पहुंचता था तो वह कई कई घंटे बातें करते थे। उन्होंने बताया कि पवन हर दुख सुख में उनके साथ खड़ा रहता था इतना कहते ही विजयपाल की आंखें भर आई।

 

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