Homeदेशसुप्रीम कोर्ट के प्रेगनेंसी खत्म करने के निर्देश, जाने पूरा मामला

सुप्रीम कोर्ट के प्रेगनेंसी खत्म करने के निर्देश, जाने पूरा मामला

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने आज शुक्रवार को महिला की प्रजनन स्वतंत्रता को अजन्मे बच्चे के अधिकार से ज्यादा जरूरी बताया है। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि ‘अगर कोई महिला प्रेग्नेंसी कंप्लीट नहीं करना चाहती है, तो कोर्ट उसे मजबूर नहीं कर सकता’।

 

 

 

 

जस्टिस बीवी नागरत्ना की अध्यक्षता वाली बेंच ने बॉम्बे हाई कोर्ट के उस आदेश को रद कर दिया, जिसमें कोर्ट ने कहा था कि महिला को 30 हफ्तों की प्रेग्नेंसी के बाद बच्चे को जन्म देना होगा। इसके बाद अगर वह बच्चा नहीं रखना चाहती तो वो उसे गोद दे सकती है।

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सुनाए अपने फैसले में महिला को 30 हफ्ते की प्रेग्नेंसी खत्म करने की इजाजत दे दी। कोर्ट ने जोर देकर कहा कि किसी महिला को उसकी मर्जी के खिलाफ प्रेग्नेंसी जारी रखने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।

नाबालिग लड़की 17 साल की उम्र में प्रेग्नेंट हुई थी और अब वह 18 साल और चार महीने की है। अब उसकी प्रेग्नेंसी 30 हफ्ते की हो गई।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बच्चा एक दोस्त के साथ रिश्ते से हुआ था और प्रेग्नेंसी जारी रखना लड़की के लिए मानसिक और शारीरिक दोनों तरह से दर्दनाक होगा।

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