– भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए छात्रों ने किया प्रदर्शन, राज्यपाल के नाम भेजा आरोप-पत्र सहित ज्ञापन।
शारदा रिपोर्टर मेरठ। मेरठ कालेज से विश्वविद्यालय में प्रदर्शन करने जा रहे दर्जनों छात्रों की पुलिस से तीखी नोंकझोंक हो गई। देखते ही देखते छात्र उग्र हो गए और नारेबाजी शुरू कर दी। हालांकि, पुलिस कर्मियों ने हंगामा कर रहे छात्रों को समझने का प्रयास किया। लेकिन छात्रों ने पुलिस की एक नहीं मानी। जिसके बाद पुलिस ने बल प्रयोग कर छात्रों को हिरासत में ले लिया और बस में भरकर पुलिस लाइन भिजवाया। इस दौरान कमिश्नरी चौराहे पर अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। जिसके चलते यहां भीषण जाम लग गया। जिसे खुलवाने में ट्रेफिक पुलिस के पसीने छूट गए।

दरअसल, विभिन्न समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर बुधवार को दर्जनों छात्र मेरठ कालेज से विश्वविद्यालय जा रहे थे। पुलिस को इस बात की भनक लगी, तो पुलिस अधिकारियों द्वारा भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया। प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय एवम संबद्ध निजी महाविद्यालयों में भ्रष्टाचार, छात्रों के आर्थिक-मानसिक शोषण, का आरोप लगाया।
विश्वविद्यालय से संबद्ध अनेक निजी महाविद्यालयों द्वारा वर्षों से छात्रों का संगठित रूप से आर्थिक एवं मानसिक शोषण किया जा रहा है। ये महाविद्यालय प्रवेश के समय निर्धारित शुल्क लेने के पश्चात भी शैक्षणिक सत्र के मध्य प्रैक्टिकल फीस, इंटर्नशिप लेटर शुल्क, लेट फीस, फैकल्टी परिवर्तन के नाम पर अतिरिक्त शुल्क तथा अन्य अवैध मदों में छात्रों से हजारों-लाखों रुपये वसूल रहे हैं।

इस संबंध में पूर्व में भी कई बार विश्वविद्यालय प्रशासन को शिकायतें दी जा चुकी हैं, परंतु दोषी संस्थानों के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई करने की जगह उन्हें संरक्षण दिया जाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण एवं विश्वविद्यालय की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने कहा कि, परिणामस्वरूप लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है तथा विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा को भी गहरी क्षति पहुंच रही है।
छात्रों ने ज्ञापन में राज्यपाल से तत्काल संज्ञान लेते हुए चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से संबद्ध ऐसे सभी भ्रष्ट निजी महाविद्यालयों की पहचान कर विशेष जांच समिति का गठन किया जाए। समिति द्वारा प्रत्येक संबद्ध महाविद्यालय की भौतिक सुविधाएँ, प्रबंधन व्यवहार, शुल्क संरचना, शैक्षणिक गुणवत्ता एवं संबद्धता मानकों की वार्षिक कठोर जांच कराई जाए। दोषी पाए जाने वाले महाविद्यालयों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर अनुशासनात्मक एवं दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।


