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Saturday, January 10, 2026
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Homeउत्तर प्रदेशMeerutमेरठ: दूषित पानी दे रहा रोग, पलायन को मजबूर सात हजार लोग

मेरठ: दूषित पानी दे रहा रोग, पलायन को मजबूर सात हजार लोग

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– नाला निर्माण बीच में अटकने से घर से बाहर भी नहीं निकल पा रहे, दो महीने से नाले का पानी पीने को मिल रहा।

शारदा रिपोर्टर मेरठ। मलियाना इलाके में सात हजार लोगों की आबादी गंदगी से परेशान है। लोगों का कहना है कि दो विभागों की खींचतान के चलते नाला नहीं बन सका। हमें दो महीने से पीने का साफ पानी नहीं मिल रहा। गली में गंदा पानी भरा रहता है। गंदगी की वजह से लोग घरों के बाहर नहीं निकल पा रहे हैं।

नगर निगम क्षेत्र के वार्ड-1 में शिव मंदिर के पास एक नाली का चौड़ीकरण कर उसको नाले का रूप देने का काम निगम ने शुरू किया। लगभग एक किलोमीटर लंबे कार्य में कुछ दिन बाद ही रेलवे विभाग के अधिकारी ने आपत्ति लगाते हुए काम बंद करा दिया।

 

 

लोगों के घरों के पानी की निकासी न होने के कारण सड़कों और घरों में पानी भर गया। इसके बाद लोगों ने वार्ड पार्षद से लेकर निगम के अधिकारियों से इसकी शिकायत भी की, लेकिन कोई हल नहीं निकला।जिस जगह पर यह नाला बन रहा है रेलवे उस जगह पर अपना हक बताता है।

निगम का कहना है कि पहले भी पानी की निकासी यहीं से होती थी और इसका ही चौड़ीकरण किया जा रहा है। निगम का काम देख रहे संबंधित जेई का कहना है कि रेलवे के डीआरएम से इस समस्या को लेकर पत्र लिखा गया है। जल्द ही विवाद खत्म हो जाएगा और कार्य शुरू हो जाएगा। लेकिन वहां रहने वाले लोगों की परेशानी दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है।

इस दर्द को पिछले ल्ल‘२ महीनों से मलियाना क्षेत्र के नगर निगम के वार्ड-1 में रहने वाले 7000 लोग झेल रहे हैं। उनका कहना है कि दो महीने से हम लगातार पार्षद, नगर निगम के यहां चक्कर काट रहे हैं। लेकिन निगम और रेलवे एक दूसरे को इसका जिम्मेदार बताकर अपना पल्ला झाड़ रहे हैं।
बताया कि लगभग दो महीने पहले यह काम शुरू हुआ था। इसके बाद यहां लगातार रूकावट आती रही हैं। रेलवे के अधिकारी आते हैं और काम बंद करा देते हैं। हमने कई बार पार्षद से भी शिकायत की, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल सका। निगम और रेलवे एक दूसरे की गलती बताते हुए पल्ला झाड़ रहे हैं।

नाला निर्माण के समय पीने के पानी की लाइन टूट गई थी जिसमें से अब नाले का पानी भी लोगों की टंकियों में पहुंच रहा है। पानी पीने योग्य नहीं बचा है इसलिए अब हम सभी लोग अब दो महीने से खरीद कर पानी पी रहे हैं। पीने के पानी में नाले जैसी बदबू आती है। हमारे स्थानीय नेता सिर्फ वोट मांगने आते हैं। जितना गंदा पानी और गंदगी यहां है उसमें यहां सिर्फ हम मर सकते हैं। निगम का पानी पीना तो दूर हाथ धोने लायक भी नहीं बचा है।

बताया कि नाले का पानी पीने के पानी में मिल गया है, जिस कारण हमारे पूरे मोहल्ले में बीमारियां बढ़ रही है। छोटे बच्चों से लेकर बड़ों तक डायरिया की समस्या बढ़ती जा रही है। निगम और रेलवे के आपसी झगड़े में हमारा जीवन पहले से भी ज्यादा बदतर हालत में हो गया है।

 

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