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Monday, February 2, 2026
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महात्मा गांधी को सुभाष चंद्र बोस ने दी थी राष्ट्रपिता की उपाधि

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मेरठ कॉलेज में धूमधाम से मनाया गया नेताजी सुभाष चंद्र बोस का 128 वां जन्मदिवस


शारदा रिपोर्टर मेरठ। मेरठ कॉलेज के इतिहास विभाग द्वारा डॉ रामकुमार गुप्ता सभागार में नेताजी सुभाष चंद्र बोस का 128 वां जन्मदिवस धूमधाम से मनाया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रसिद्ध इतिहासकार प्रोफेसर केडी शर्मा ने सुभाष चंद्र बोस के नेता बनने की कहानी प्रस्तुत की। इस इस कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में मेरठ कॉलेज प्रबंध समिति के पूर्व अध्यक्ष जीके अग्रवाल ने भी सहभागिता की।

यहां उल्लेखनीय है की जीके अग्रवाल आजाद हिंद फौज के कर्नल ढिल्लन के मित्र रहे हैं। प्रो चंद्रशेखर ने कार्यक्रम की शुरूआत निम्न पंक्तियों से की- जंजीरों को तोड़ने की आवाज बन गए/ हर दिल में आजादी का आगाज बन गए। डॉक्टर केडी शर्मा ने बताया कि कोलकाता के रिसर्च ब्यूरो में नेताजी से संबंधित कलेक्टिव वर्क आफ सुभाष चंद्र बोस नामक पुस्तक है। इसके 12 खंड हैं। नेताजी सुभाष चंद्र बोस के बारे में इन 12 खंडों से उनके संपूर्ण जीवन का पता लग जाता है। 1920 में जब कांग्रेस की कमान गांधी जी के पास थी तो उन्होंने गांधी जी से भी प्रश्न किया था कि एक वर्ष तक यदि भारतीय जनता गांधी जी के कार्यक्रम का अनुसरण करे तो किस प्रकार 1 वर्ष में स्वराज की प्राप्ति हो जाएगी।

वह गांधी जी से सहमत नहीं थे उन्होंने अपना दूसरा रास्ता चुना। 1937 में वह कांग्रेस के अध्यक्ष चुने गए और 1939 में पुन: अध्यक्ष चुने गए, किंतु गांधी जी से मतभेद के चलते उन्होंने त्यागपत्र दे दिया और फिर फारवर्ड ब्लाक की स्थापना की। जिसमें पहली बार सुभाष चंद्र बोस ने गांधी जी को फादर आफ नेशन अर्थात राष्ट्रपिता कहा। विशिष्ट अतिथि जीके अग्रवाल ने संबोधित करते हुए बताया की आजाद हिंद फौज की स्थापना सुभाष चंद्र बोस ने नहीं बल्कि जनरल मोहन सिंह ने की थी।

मेरठ कॉलेज के प्रो नीरज कुमार ने बताया कि जब वह जापान गए थे टोक्यो से 4 किलोमीटर दूर रैंकोजी पगोडा टेंपल है, जिसमें नेताजी सुभाष चंद्र बोस की अस्थियां संरक्षित की गई है। यह अस्थियां 15 सितंबर 1945 से संरक्षित है।

प्रोफेसर बकुल रस्तोगी ने सभा को जानकारी देते हुए कहा की जय हिंद का नारा जिससे सारा देश आज भी एकता का अनुभव करता है नेताजी की महान दिन है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता इतिहास विभाग की प्रोफेसर अर्चना सिंह ने की और कार्यक्रम का संचालन प्रो चंद्रशेखर भारद्वाज ने किया। कार्यक्रम के अंत में विभाग की अध्यक्ष प्रो अर्चना सिंह ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में अर्चित बंसल, रोहित कश्यप, जॉनी कुमार, अलकेश, शिव वर्धन इत्यादि का सहयोग रहा।

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