– स्वर्ण समाज के लोगों ने यूजीसी के विरोध में मंडलायुक्त कार्यालय पर प्रदर्शन कर उठाई मांग।
शारदा रिपोर्टर मेरठ। बैनर पर लिखे ‘हमारी भूल कमल का फूल’ को लेकर बुधवार को स्वर्ण समाज के दर्जनों लोगों ने कमिश्नरी चौराहे पर प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने बताया कि, यूजीसी को तत्काल प्रभाव से वापिस लिया जाए। उन्होंने कहा कि यूजीसी की नई अधिसूचना उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति-धारित भेदभाव को रोकने के उद्देश्य से लाया जाना बताया गया है। लेकिन यह अधिसूचना पूरी तरह एससी-एसटी एवं ओबीसी वर्ग के के अधिकारों पर केंद्रित है, जबकि सामान्य वर्ग के छात्र के सिद्धांत को कमजोर कर यह अधिसूचना एकतरफा दिखाई दे रही है। जो कि एक वर्ग के अधिकारों के लिए प्रतिकूल है।

उन्होंने कहा कि प्रारंभिक ड्राफ्ट में ओबीसी वर्ग को शामिल न किए जाने तथा झूठी या फर्जी शिकायतों पर किसी प्रकार के दंडात्मक प्रावधान के अभाव को लेकर व्यापक विवाद उत्पन हुआ था। जबकि, अंतिम संस्करण में ओबीसी वर्ग को सम्मिलित कर लिया गया, दुर्भावनापूर्ण अथवा झूठी शिकायत इस अधिसूचना को और अधिक खतरनाक बनाता है।
यह नियमावली उत्तर प्रदेश सहित देश के विश्वविद्यालयों पर लागू की जा चुकी है, जिसके यह तथ्य भी विचारणीय हैं। अगर 140 करोड़ है, जिसमें से लगभग एक-तिहाई करोड़ों छात्रओं एवं नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का प्रत्यक्ष उल्लंघन करती है। इसलिए यूजीसी के इस बिल को तत्काल प्रभाव से खारिज किया जाए। क्योंकि एक तरफ जहां इससे जातीय संघर्ष और भेदभाव और ज्यादा बढ़ेगा। वहीं सवर्ण वर्ग के मूलभूत अधिकारों का भी पूरी तरह हनन होगा।


