HomeCRIME NEWSसजा के बाद रातभर करवटें बदलते रहे रविता-अमरदीप

सजा के बाद रातभर करवटें बदलते रहे रविता-अमरदीप

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दोनों की सेहत को लेकर जेल प्रशासन अलर्ट, आज से शुरू हो जाएगी काउंसलिंग


शारदा रिपोर्टर मेरठ। अमित कश्यप हत्याकांड में फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद रविता और अमरदीप की जेल में पहली रात बेचैनी के बीच गुजरी। दोनों को नई बैरकों में शिफ्ट कर दिया गया है। जेल प्रशासन ने उनकी निगरानी बढ़ा दी है। रविता की तबीयत खराब होने के चलते आज से उसकी काउंसलिंग शुरू कराने की तैयारी है।

जेल प्रशासन का प्रयास है कि अदालती फैसले के बाद पैदा हुए तनाव का उसके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर न पड़े। दोनों को अब सजायाफ्ता कैदियों के रूप में रखा गया है और उनकी नई पहचान कैदी नंबर 399/2026 और 400/2026 होगी।

जेल सूत्रों के मुताबिक, फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद पहली रात दोनों की बेचैनी में गुजरी। रविता को बैरक नंबर 12ए और अमरदीप को बैरक नंबर 1ए में शिफ्ट किया गया है। दोनों सजायाफ्ता कैदियों के कपड़ों में नई बैरकों तक पहुंचे। जेल प्रशासन ने उनकी सुरक्षा और निगरानी के इंतजाम भी बढ़ाए हैं। बैरकों के बाहर अतिरिक्त स्टाफ तैनात किया गया है, जो उन पर नजर रखेगा।

रविता की तबीयत खराब होने के कारण जेल प्रशासन उसकी सेहत को लेकर सतर्क है। शनिवार से उसकी काउंसलिंग शुरू कराने की तैयारी है। इसका उद्देश्य सजा के बाद पैदा हुए मानसिक दबाव से निपटने में उसकी मदद करना और स्वास्थ्य की स्थिति पर नजर रखना है।

रविता पहले से जेल में बैग बनाने का काम कर रही थी। जेल प्रशासन के संकेत हैं कि आगे भी उसे यही काम दिया जा सकता है।

अमरदीप को भी जल्द मिलेगी जिम्मेदारी
अमरदीप 7 अक्टूबर को दोषसिद्ध होने के बाद जेल पहुंचा था। अब उसे भी जेल की निर्धारित व्यवस्था के तहत काम सौंपा जाएगा। शनिवार से दोनों को काम की जिम्मेदारी दिए जाने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। जेल में सजायाफ्ता कैदियों के लिए निर्धारित व्यवस्था के तहत उनकी दिनचर्या तय की जाएगी।

साहिल वाली बैरक में रहेगा अमरदीप
इस मामले में एक अहम बात यह है कि जिस बैरक में सौरभ राजपूत हत्याकांड का दोषी साहिल शुल्का को रखा गया है, उसी बैरक में अमरदीप को भी रखा गया है। हालांकि, दोनों की दिनचर्या और सुरक्षा संबंधी व्यवस्था जेल प्रशासन के नियमों के अनुसार तय की गई है।

रविता की सुरक्षा और निगरानी बढ़ाई
जेल सूत्रों के अनुसार, दोनों की निगरानी बढ़ाने के पीछे उनकी सुरक्षा को लेकर सतर्कता भी एक वजह है। सजा के बाद उनकी मानसिक स्थिति को लेकर चिंता जताई जा रही है। ऐसे में किसी संभावित अप्रिय स्थिति से बचने के लिए अतिरिक्त स्टाफ तैनात किया गया है। जेल प्रशासन की प्राथमिकता दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ उनकी सेहत पर नजर रखना है।

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