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Tuesday, January 27, 2026
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कैलाश प्रकाश स्पोट्स स्टेडियम: पानी के इंतजार में कई सालों से बंद पड़ा है स्वीमिंग पूल

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2008 में राष्ट्रीय स्तर के मानकों पर तैयार किया गया था पूल अब हो गया बदहाल।


शारदा रिपोर्टर मेरठ। कैलाश प्रकाश स्पोट्स स्टेडियम की बात हो तो जेहन में सबसे पहले खेल और उससे जुड़े खिलाड़ियों का ख्याल आता है। बॉक्सिंग, एस्ट्रोटर्फ मैदान, तीरंदाजी, जुडो-कराटे, एथेलेटिक्स, बैडमिंटन खेलने वाले तमाम खिलाड़ी बड़ी-बड़ी प्रतियोगिताओं में नाम कमाने के लिए यहां दिन-रात मेहनत में जुटे हुए हैैं। ये बात अलग है कि, किसी खेल में परमानेंट कोच नहीं है, तो किसी खेल के लिए उपकरणों की कमी है। लेकिन काम चल रहा है। मगर बात तैराकी यानी स्विमिंग की हो तो उसके लिए यहां ओलंपिक साइज का पूल तो हैै लेकिन ढाई साल जर्जर हाल के चलते न तो कोई कोच बचा है और न ही खिलाड़ी।

गौरतलब है कि, साल 2008 में तैयार हुए इस स्विमिंग पूल को राष्ट्रीय स्तर के मानकों पर तैयार किया गया था। स्टेडियम के अंदर बने इस स्विमिंग पूल में हर साल एक या दो अप्रैल को स्विमिंग पूल खिलाड़ियों के अभ्यास और प्रतियोगिताओं के लिए खुलता था। इसके बाद यहां सितंबर तक खिलाड़ी अभ्यास करते थे। लेकिन ढाई साल पहले स्विमिंग पूल को खराब हालत के कारण बंद कर दिया गया था। अंतिम तैराकी प्रतियोगिता 2023 में हुई थी। उसके बाद से एक भी तैराकी प्रतियोगिता नहीं हुई है। स्विमिंग पूल की दीवारों के जर्जर होने के कारण पूल में भरा पानी दीवारों से रिसने लगा था। जिस कारण से इसे बंद कर दिया गया। इसके बाद बजट के अभाव में तीन साल से पूल बंद है।

1.63 करोड़ का बजट: स्पोर्ट्स स्टेडियम में बने इस स्वीमिंग पूल की हालत सुधारने के लिए गत वर्ष इसको अपडेट करने की योजना तैयार की गई थी। इसके लिए बकायदा प्लानिंग कर स्विमिंग को अपडेट कर कोच और लाइफ गार्ड तक के लिए बजट तैयार गया था। इस योजना के अनुसार स्वीमिंग पूल के लिए 1.63 करोड़ रुपये का फंड भी जारी हो चुका है लेकिन स्विमिंग पूल की मरम्मत का कार्य शुरू नहीं हो सका है।

नहीं हो पाई कोई प्रतियोगिता, प्रतिभाओं की तलाश भी अटकी: इस पूल के बंद होने से पूरे साल में कोई भी राज्य स्तरीय, जिला स्तरीय प्रतियोगिता या मंडल स्तरीय ट्रायल या प्रतियोगिता नहीं हो पाई है। इतना ही नही खिलाड़ी भी अपनी स्विमिंग प्रैक्टिस तक नही का पा रहे हैं। एक तैराक को नेशनल चैंपियनशिप के लिए सुबह-शाम तीन-तीन घंटे के अभ्यास की जरूरत है। छह माह तक वह नियमित अभ्यास करता है। पूल बंद होते ही अभ्यास रुक जाता है। इसी तरह स्टेट लेबल के खिलाड़ियों को निजी स्विमिंग का सहारा लेना पड़ रहा है।

स्वीमिंग पूल का कायाकल्प करने का कांट्रेक्ट उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट कापोर्रेशन लिमिटेड को दिया जा चुका है। कंपनी के खाते में शासन स्तर से मेंटिनेंस राशि के रूप में 1.63 करोड़ रुपये भेजे भी जा चुके हैं। जल्द पूल के मेंटिनेंस का कार्य शुरू हो जाएगा। – अतुल सिन्हा, क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी

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