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Sunday, February 8, 2026
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Homeउत्तर प्रदेशMeerutमेरठ मुझे बहुत प्रिय है, यहां अच्छा लग रहा : रामभद्राचार्य

मेरठ मुझे बहुत प्रिय है, यहां अच्छा लग रहा : रामभद्राचार्य

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शारदा रिपोर्टर मेरठ। भामाशाह पार्क में स्वामी रामभद्राचार्य की कथा का आज बुधवार को तीसरा दिन है। जैसे ही रामभद्राचार्य जी पंडाल में पहुंचे तो यहां मौजूद भक्तों ने हाथ जोड़कर उनको प्रणाम किया। भक्तों ने जय श्री राम का जयकारा लगाया। कथा शुभारंभ से पहले व्यास गद्दी का पूजन किया गया। आज के यजमान महावीर अग्रवाल हैं। जिन्होंने पूजन सम्पन्न किया।

स्वामी रामभद्राचार्य ने कहा कि मेरठ मुझे बहुत प्रिय है। यहां आकर बहुत अच्छा लग रहा है। मेरठ के लोग जब जब बुलाएंगे, मैं तब तब आऊंगा। यहां रोज मुझे नई-नई अनुभूतियां हो रहीं, जो मुझे विरले ही होती हैं। वहीं तुलसी पीठ पर सवाल उठाने वालों को उन्होंने इशारों में बड़ी बात कह दी। कहा कि तुलसी पीठ पर सवाल उठा रहे हैं उनकी सबकी कुंडली मेरे पास है खोलकर रख दूंगा।
बता दें कि कथा 8 सितंबर को प्रारंभ हुई। कथा 16 सितंबर तक चलेगी। स्वामी जी ने कहा कि ये सब कार्य भगवान राम के आशीर्वाद से कर रहे हैं। कहा रामजी की कथा सालों से संसार सागर में डूबते लोगों को बचाती चली आ रही है। कहा कि मत्स्यावतार में पृथ्वी को नाव बनाया था यहां तो रामजी की कथा ही नाव है।

रामभद्राचार्य ने कहा कि मैं उच्च कोटि का ब्राह्मण हूं, साधु, सन्यासी, एक विशिष्ट संप्रदाय रामानंदाचार्य से हूं। इस संप्रदाय में 70 लाख साधु हैं। कथावाचक की बात को हल्के में नहीं लेना चाहिए। मेरे वक्तव्य से लाखों लोग रामभक्त बन गए। कहा कि तुलसी पीठ पर प्रश्न उठाने वालों को जवाब देना बहुत जरूरी है। कहा कि तुलसी पीठ 24वें त्रेता में बना था। पादुका पूजन की परंपरा जहां से चले, वह पीठ होती है। भगवान राम ने सर्वप्रथम भरत जी को पादुका प्रदान की थी। पादुका देकर भगवान रामचंद्र जी ने यह परंपरा शुरू की।

कहा कि तुलसी पीठ का परंपरागत जगद्गुरु रामानंदाचार्य हूं। जो भी शास्त्रार्थ करना चाहेगा, मैं अपने उत्तराधिकारी से ही शास्त्रार्थ करा दूंगा। प्रभु श्रीराम को जगद्गुरु कहा गया है। राम जी ने पादुका परंपरा चलाई। उसी रामानंदाचर्या पीठ से जगद्गुरु हैं, उसी पीठ के उत्तराधिकारी अपने परम और प्रिय भक्त आचार्य श्री रामचंद्र जी को घोषित किया।

मेरे उत्तराधिकारी से शास्त्रार्थ करके दिखाएं

भगवान श्रीराम को जगद्गुरु कहा गया है। राम जी ने पादुका परंपरा चलाई। उसी रामानंदाचर्या पीठ से जगद्गुरु हैं, उसी पीठ के उत्तराधिकारी अपने परम और प्रिय भक्त आचार्य श्री रामचंद्र जी को घोषित किया। स्वामी रामभद्राचार्य ने कड़े शब्दों में कहा कि तुलसीपीठ पर कतई प्रश्न न उठाएं, मेरे पास सबकी कुंडली है, खोलकर रख दूंगा। तुलसी पीठ का परंपरागत जगद्गुरु रामानंदाचार्य हूं। जो भी शास्त्रार्थ करना चाहेगा, मैं अपने उत्तराधिकारी से ही शास्त्रार्थ करा दूंगा।

सत्संग में एडमिशन, तभी जुड़ेगा भगवान से इंटरनल कनेक्शन

स्वामी रामभद्राचार्य ने कहा कि कथावाचन आनंदमय होने के लिए होती है। भगवान के प्रति अटेंशन होगा, तब इंटरनल कनेक्शन होगा। यह तब होगा जब आपके ऐसे सत्संग में एडमिशन होगा। हमें श्रीराम कथा जरूर सुननी चाहिए। उन्होंने कहा कि भगवान के मुख्य दस अवतार हैं – इनमें प्रभु श्रीराम अवतार और अवतारी दोनों हैं। भगवान राम प्रभाव का कम, स्वभाव का अधिक प्रयोग करते हैं। श्रीराम जी जैसा स्वभाव न कहीं देखा है और न सुना है। तुलसीदास जी संस्कृत के ज्ञाता थे।

 

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