मेरठ। उत्तर प्रदेश के जनपद मेरठ के कपसाड़ गांव में जिस प्रकार खुलेआम तालीबानी ढंग से एक महिला की निर्मम हत्या कर दी, गई और उसकी मासूम बेटी को दबंगों द्वारा जबरन उठाकर ले जाया गया, वह घटना न केवल कानून व्यवस्था की विफलता है बल्कि मानवता पर भी सीधा हमला है। यह कोई सामान्य अपराध नहीं, बल्कि समाज में भय फैलाने और न्याय व्यवस्था को चुनौती देने का संगठित प्रयास है।

सबसे बड़ा और गंभीर सवाल यह है कि जिन लोगों ने दिनदहाड़े एक मां की हत्या की और उसकी बेटी का अपहरण किया, वे अब तक कहाँ छिपे बैठे हैं। क्या उन्हें राजनीतिक या प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त है।
इसी जघन्य घटना के विरोध में चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ में छात्रों, अधिवक्ताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं की एक बैठक आयोजित की गई, जिसमें सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि यदि 48 घंटे के भीतर हत्या और अपहरण का खुलासा नहीं किया गया, दोषियों की गिरफ्तारी नहीं हुई और अपहृत बेटी को सुरक्षित बरामद नहीं किया गया, तो विश्वविद्यालय परिसर में अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू किया जाएगा।
बैठक में उपस्थित आदेश प्रधान एडवोकेट ने कहा कि कपसाड़ की घटना कानून व्यवस्था की खुली हत्या है और यदि तय समय में खुलासा नहीं हुआ तो यह संघर्ष सड़क तक लड़ेंगे।
शशिकांत ओर अनुज भड़ाना ने कहा कि एक मां की हत्या और बेटी का अपहरण पूरे समाज के लिए चेतावनी है और अब चुप रहना अपराध के साथ खड़ा होना होगा। आकाश भडाना ने स्पष्ट किया कि केवल अपराधी ही नहीं, बल्कि उन्हें संरक्षण देने वालों को भी बेनकाब किया जाएगा।
रविन्द्र प्रधान ने कहा कि पुलिस की भूमिका संदेह के घेरे में है और प्रशासन को अब जवाब देना ही होगा।
अरुण ने कहा कि यह आंदोलन किसी एक परिवार का नहीं बल्कि हर उस आवाज़ का है जिसे दबाने की कोशिश की जा रही है।
अजय ने कहा कि अगर आज न्याय नहीं मिला तो कल किसी की भी बेटी सुरक्षित नहीं रहेगी।
अनिकेत सागर ने कहा कि विश्वविद्यालय का छात्र अन्याय के खिलाफ खड़ा है।

अंत में सभी ने एक स्वर में कहा कि यह लड़ाई डर की नहीं, हक़ और न्याय की है, और इसे किसी भी हालत में रोका नहीं जा सकता। बैठक में आदेश प्रधान एडवोकेट, अनुज भड़ाना , आकाश भड़ाना, शशिकांत गौतम, अरुण, कुलपदीप , रविन्द्र प्रधान , आदि लोग मौजूद रहे।


